नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी अब केवल ‘हिंदी बेल्ट’ की पार्टी नहीं रह गई है, बल्कि देशभर में अपनी मजबूत राजनीतिक मौजूदगी दर्ज करा चुकी है। पिछले कुछ वर्षों के चुनावी आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि पार्टी का विस्तार तेजी से गैर-हिंदी भाषी राज्यों तक भी हुआ है।

एक समय था जब बीजेपी की पहचान मुख्य रूप से उत्तर भारत के हिंदी भाषी राज्यों तक सीमित मानी जाती थी, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। वर्तमान में पार्टी के 17 मुख्यमंत्री देश के अलग-अलग राज्यों में सत्ता संभाल रहे हैं। वहीं, NDA/NEDA गठबंधन के सहयोग से बीजेपी 5 अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी सत्ता का हिस्सा है।
हिंदी और गैर-हिंदी राज्यों में मजबूत पकड़
बीजेपी ने हिंदी भाषी क्षेत्रों में अपनी पकड़ तो बरकरार रखी ही है, साथ ही गैर-हिंदी राज्यों में भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है—
- पूर्वी भारत: असम, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में मजबूत उपस्थिति
- पश्चिम भारत: महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा में सरकार या गठबंधन
- दक्षिण भारत: कर्नाटक में प्रभावशाली प्रदर्शन और आंध्र प्रदेश में गठबंधन के साथ सत्ता में भागीदारी
2014 के बाद तेज हुआ विस्तार
2014 के बाद बीजेपी ने असम, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में तेजी से अपनी पकड़ मजबूत की है। कई जगहों पर पार्टी अपने क्षेत्रीय सहयोगियों से आगे निकलकर प्रमुख शक्ति बनकर उभरी है।
विधानसभाओं में सीट शेयर का विश्लेषण
ताजा आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों में बीजेपी का सीट शेयर इस प्रकार है—
- हिंदी क्षेत्र: 60.4%
- गैर-हिंदी पश्चिम: 55.1%
- गैर-हिंदी पूर्व: 52.6%
- गैर-हिंदी उत्तर: 15.0%
- गैर-हिंदी दक्षिण: 10.1%
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि हिंदी क्षेत्र में पार्टी की पकड़ सबसे मजबूत बनी हुई है, लेकिन पश्चिम और पूर्व के गैर-हिंदी राज्यों में भी बीजेपी लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रही है।
राष्ट्रीय पार्टी के रूप में उभरती बीजेपी
हालांकि दक्षिण भारत और कुछ उत्तरी गैर-हिंदी राज्यों में पार्टी अभी भी अपेक्षाकृत कमजोर है, लेकिन वहां भी उसका जनाधार धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
कुल मिलाकर, बीजेपी अब क्षेत्रीय पहचान से आगे बढ़कर एक अखिल भारतीय राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित हो चुकी है, जिसकी मौजूदगी देश के लगभग हर हिस्से में महसूस की जा रही है।
