भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु अधिकारी कौन? बंगाल की राजनीति में नया शक्ति केंद्र

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। शुभेंदु अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके गढ़ भवानीपुर सीट से हराकर सियासी हलचल तेज कर दी है। इससे पहले 2021 में भी उन्होंने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को शिकस्त दी थी। लगातार दूसरी बार सीएम को हराकर शुभेंदु अधिकारी अब राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गए हैं।

कौन हैं शुभेंदु अधिकारी?

शुभेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के कांथी में हुआ। उनका परिवार लंबे समय से राजनीति से जुड़ा रहा है। उनके पिता शिशिर अधिकारी भी राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे हैं।

उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1989 में कांग्रेस की छात्र राजनीति से की और 1995 में कांथी नगरपालिका से पार्षद बने।

TMC से BJP तक का सफर

1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना के बाद शुभेंदु अधिकारी उसमें शामिल हो गए और तेजी से उभरे। संगठन में उनकी पकड़ मजबूत होती गई और उन्हें राज्य सरकार में परिवहन व सिंचाई जैसे अहम विभाग भी मिले।

लेकिन 2020 में उन्होंने TMC छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। यह फैसला बंगाल की राजनीति में टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

ममता बनर्जी को दो बार हराने का रिकॉर्ड

  • 2021: नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराया
  • 2026: भवानीपुर सीट से फिर दी शिकस्त

इन जीतों ने शुभेंदु अधिकारी को बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा बना दिया है।

विपक्ष से सत्ता की ओर?

2021 के बाद उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया। अब 2026 की जीत के बाद उनका नाम मुख्यमंत्री पद की दौड़ में भी तेजी से उभर रहा है।

राजनीतिक विश्लेषण

शुभेंदु अधिकारी की ताकत उनकी जमीनी पकड़, संगठन क्षमता और रणनीतिक राजनीति मानी जाती है। ममता बनर्जी जैसे मजबूत नेता को लगातार दो बार हराना उनकी राजनीतिक क्षमता को दर्शाता है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में अब एक नया समीकरण बन चुका है। शुभेंदु अधिकारी सिर्फ विपक्ष के नेता नहीं रहे, बल्कि सत्ता के प्रमुख दावेदार बनकर उभरे हैं। आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति किस दिशा में जाएगी, यह काफी हद तक उनके अगले कदम पर निर्भर करेगा।

 

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