बीजिंग/वॉशिंगटन: अमेरिका और चीन के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का 13 से 15 मई तक प्रस्तावित चीन दौरा दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। दौरे से पहले चीन ने अमेरिका को साफ संदेश देते हुए कहा है कि कुछ मुद्दों पर किसी भी तरह का समझौता संभव नहीं है।

अमेरिका में मौजूद चीनी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर कहा कि चीन-अमेरिका संबंधों में चार ऐसी “रेड लाइन” हैं, जिन्हें किसी भी हालत में पार नहीं किया जाना चाहिए। चीन ने जिन चार मुद्दों को अपनी संवेदनशील सीमा बताया है, उनमें ताइवान का मुद्दा, लोकतंत्र और मानवाधिकार, दोनों देशों की राजनीतिक व्यवस्था और चीन के विकास का अधिकार शामिल हैं।
चीनी दूतावास ने कहा कि दोनों देशों को टकराव की बजाय आपसी सम्मान, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और सहयोग के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए। चीन ने यह भी कहा कि स्थिर और रचनात्मक रिश्ते ही दोनों देशों और दुनिया के हित में हैं।
उधर, चीन रवाना होने से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह दौरा बेहद अहम साबित होगा। उन्होंने बताया कि दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी NVIDIA के CEO जेन्सेन हुआंग भी उनके साथ चीन जा रहे हैं। ट्रंप ने CNBC की उस रिपोर्ट को गलत बताया, जिसमें कहा गया था कि हुआंग को यात्रा के लिए आमंत्रित नहीं किया गया।
ट्रंप के साथ कई बड़े अमेरिकी कारोबारी भी चीन पहुंचे हैं। इनमें टेस्ला के मालिक इलॉन मस्क, एप्पल CEO टिम कुक, ब्लैकरॉक के लैरी फिंक, स्टीफन स्वार्जमैन, जेन फ्रेजर और गोल्डमैन सैक्स के डेविड सोलोमन जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
ट्रंप ने कहा कि वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से चीन की अर्थव्यवस्था को और खोलने को लेकर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर चीन अपने बाजार को और खोलेगा तो इससे दोनों देशों को बड़ा फायदा होगा और दुनिया की बड़ी कंपनियां चीन में नई संभावनाएं तलाश सकेंगी।
व्हाइट हाउस के मुताबिक, अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप इस दौरे में शामिल नहीं हैं। ट्रंप के साथ विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और कई वरिष्ठ अधिकारी एयरफोर्स वन में मौजूद हैं।
ईरान को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को किसी की मदद की जरूरत नहीं है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि ईरान या तो सही फैसला करेगा या फिर अमेरिका अपना काम पूरा करेगा।
अब दुनिया की नजर ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात पर टिकी हुई है, क्योंकि इस बैठक का असर वैश्विक राजनीति और कारोबार दोनों पर पड़ सकता है।
