बंगाल में सरकार बदलने के बाद क्या रुकेगी बांग्लादेशी घुसपैठ? BSF के पूर्व DIG ने बताए बड़े खतरे

नई दिल्ली / Aawaz Plus:
भारत-बांग्लादेश सीमा पर लगातार हो रही अवैध घुसपैठ को लेकर देशभर में चिंता बढ़ती जा रही है। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव की चर्चाओं के बीच अब सीमा पर वर्षों से लंबित फेंसिंग कार्य को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं। इसी मुद्दे पर BSF के पूर्व डीआईजी नरेंद्र नाथ धर दुबे ने कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं।

पूर्व डीआईजी नरेंद्र नाथ धर दुबे के अनुसार भारत-बांग्लादेश सीमा करीब 4100 किलोमीटर लंबी है, जो दुनिया की सबसे बड़ी जमीनी सीमाओं में शामिल है। इस सीमा का लगभग 900 किलोमीटर हिस्सा नदी और दलदली क्षेत्रों से घिरा हुआ है, जहां फेंसिंग करना बेहद कठिन है। उन्होंने बताया कि मानसून के दौरान कई नदियों का स्वरूप बदल जाता है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और चुनौतीपूर्ण हो जाती है।

उन्होंने कहा कि सीमा के दोनों ओर रहने वाले लोगों की भाषा, पहनावा, खानपान और संस्कृति लगभग समान है। यही वजह है कि घुसपैठियों की पहचान करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए आसान नहीं होता। कई मामलों में स्थानीय नेटवर्क और दलाल भी घुसपैठियों की मदद करते हैं।

BSF के पूर्व अधिकारी ने बताया कि अब पारंपरिक फेंसिंग के साथ-साथ “स्मार्ट बॉर्डर मैनेजमेंट” पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके तहत कैमरे, सेंसर, रडार, फ्लड लाइट और आधुनिक निगरानी प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है। धुबरी इलाके में ‘कंपोजिट इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम’ यानी CIBMS के तहत पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किया गया है।

नरेंद्र नाथ धर दुबे ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में वर्षों तक सीमा सुरक्षा से जुड़े कई कार्य राजनीतिक और प्रशासनिक कारणों से प्रभावित रहे। सीमा चौकियों के लिए जमीन आवंटन में देरी और फेंसिंग कार्य रुकने का सीधा फायदा घुसपैठियों, तस्करों और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क को मिला।

उन्होंने दावा किया कि देश के कई राज्यों में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज बनवाकर रह रहे हैं। ऐसे लोगों की पहचान करना अब सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।

पूर्व डीआईजी ने मानव तस्करी, ड्रग्स सप्लाई, नकली नोट और हथियारों की तस्करी को भी गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा केवल BSF की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें राज्य पुलिस, खुफिया एजेंसियों और आम जनता की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने सीमावर्ती गांवों के लोगों से भी सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि बिना सत्यापन किराए पर मकान देना, फर्जी दस्तावेज बनवाने में मदद करना और संदिग्ध गतिविधियों को नजरअंदाज करना देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।

फिलहाल सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार नई रणनीतियों पर काम कर रही हैं। अब देखने वाली बात होगी कि आने वाले समय में फेंसिंग और आधुनिक तकनीक के जरिए घुसपैठ और तस्करी पर कितना नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WhatsApp icon
AWAZ PLUS
Contact us!
Phone icon
AWAZ PLUS