वाशिंगटन: मानव अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। NASA के Artemis-2 Mission ने सफलतापूर्वक अपनी ऐतिहासिक यात्रा पूरी कर ली है। चंद्रमा की परिक्रमा कर लौटे चारों अंतरिक्ष यात्री शुक्रवार को सुरक्षित प्रशांत महासागर में उतरे। इस मिशन के साथ ही अब चंद्रमा पर मानव बस्ती बसाने की दिशा में ठोस कदम बढ़ा दिए गए हैं।

1972 के बाद पहली मानवयुक्त चंद्र यात्रा
आर्टेमिस-2 मिशन, Apollo 17 Mission के बाद चंद्रमा की ओर जाने वाली पहली मानवयुक्त उड़ान रही। मिशन कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन ने करीब 10 दिन की यह ऐतिहासिक यात्रा पूरी की। वापसी के बाद वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने इसे भविष्य के मिशनों के लिए एक निर्णायक सफलता बताया।
11 लाख किलोमीटर से अधिक की दूरी तय
इस मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों ने लगभग 11.17 लाख किलोमीटर की दूरी तय की। यह Orion Crew Capsule और Space Launch System (SLS) का पहला मानवयुक्त परीक्षण था, जिसने यह साबित कर दिया कि इंसानों को पृथ्वी की कक्षा से बाहर सुरक्षित भेजना और वापस लाना संभव है। मिशन के दौरान यात्रियों ने चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से (far side) का भी अवलोकन किया, जिसे अब तक किसी मानव ने प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा था।
अब लक्ष्य—चंद्रमा पर मानव बस्ती
नासा के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि अगला कदम Artemis-3 Mission होगा, जिसमें चंद्रमा की सतह पर मानव उतारने के साथ वहां दीर्घकालिक बस्ती बसाने की तैयारी की जाएगी। यह बस्ती भविष्य में मंगल और अन्य ग्रहों पर मिशनों के लिए आधार (launch pad) का काम करेगी।
नई अंतरिक्ष दौड़ की शुरुआत
नासा के वरिष्ठ अधिकारी अमित क्षत्रिय ने कहा कि यह मिशन सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि मानव जाति के लिए एक नए युग की शुरुआत है। चंद्रमा पर स्थायी उपस्थिति स्थापित करना अब केवल सपना नहीं, बल्कि एक स्पष्ट लक्ष्य बन चुका है।
इस सफल मिशन के साथ ही दुनिया एक बार फिर अंतरिक्ष अन्वेषण के नए दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां चंद्रमा पर मानव बसावट अब दूर की कल्पना नहीं बल्कि आने वाले समय की हकीकत बन सकती है।
