रेजिनगर/मुर्शिदाबाद | आवाज़ प्लस
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मुर्शिदाबाद जिले की रेजिनगर सीट इस बार राज्य की सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल सीटों में शामिल हो गई है। कई प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से यहां मुकाबला बेहद कड़ा और बहुकोणीय बन गया है। पहले चरण में होने वाले मतदान को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं।

मुख्य उम्मीदवारों के बीच सीधी टक्कर
रेजिनगर सीट पर इस बार सबसे ज्यादा चर्चा आम जनता उन्नयन पार्टी के हुमायूं कबीर को लेकर है, जो तृणमूल कांग्रेस छोड़ने के बाद पहली बार अपनी नई पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने तृणमूल कांग्रेस के अताउर रहमान मजबूत दावेदार के रूप में खड़े हैं।
इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी ने बापन घोष को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस से जिल्लू शेख और पश्चिम बंगाल सोशलिस्ट पार्टी से तुषार कांति चटर्जी भी मैदान में हैं। इन सभी उम्मीदवारों की मौजूदगी ने चुनाव को त्रिकोणीय से आगे बढ़ाकर बहुकोणीय बना दिया है।
हुमायूं कबीर फैक्टर बना निर्णायक
हुमायूं कबीर का इस सीट से चुनाव लड़ना इस बार का सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। वे पहले तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर भरतपुर सीट से जीत चुके हैं, लेकिन 2025 में पार्टी छोड़कर उन्होंने अपनी नई पार्टी बनाई।
उनकी व्यक्तिगत पकड़ और स्थानीय प्रभाव के चलते उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है। हालांकि, उनकी उम्मीदवारी से सबसे ज्यादा नुकसान तृणमूल कांग्रेस को होने की संभावना जताई जा रही है, खासकर मुस्लिम वोट बैंक में सेंध के रूप में।
पिछले चुनावों का प्रदर्शन
2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के रबीउल आलम चौधरी ने इस सीट पर बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार को 68 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया था।
वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में भी इस क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस को बढ़त मिली थी, जिससे यह सीट पार्टी के लिए परंपरागत रूप से मजबूत मानी जाती रही है।
क्यों अहम है रेजिनगर सीट?
रेजिनगर विधानसभा क्षेत्र 2011 में अस्तित्व में आया था और तब से यहां राजनीतिक समीकरण लगातार बदलते रहे हैं। यहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या प्रभावी मानी जाती है, जो अब तक तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में रही है।
लेकिन इस बार हुमायूं कबीर की मौजूदगी से समीकरण बदल सकते हैं। वोटों के बंटवारे की संभावना ने मुकाबले को और ज्यादा रोचक बना दिया है।
चुनावी आंकड़े
निर्वाचन आयोग के अनुसार, 2021 में इस सीट पर कुल 2,59,771 मतदाता पंजीकृत थे। इनमें 1,34,021 पुरुष, 1,25,741 महिला और 9 तीसरे लिंग के मतदाता शामिल थे।
रेजिनगर सीट पर इस बार का चुनाव केवल एक विधायक चुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने वाला अहम मुकाबला बन गया है। हुमायूं कबीर की चुनौती, तृणमूल कांग्रेस की पकड़ और विपक्षी दलों की मौजूदगी—इन सबके बीच परिणाम क्या होगा, यह 4 मई को मतगणना के दिन साफ होगा।
