नई दिल्ली/ढाका: बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसक घटनाओं और हत्याओं के बीच भारत सरकार ने एक अहम कूटनीतिक फैसला लिया है। वरिष्ठ भाजपा नेता दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का अगला हाई कमिश्नर नियुक्त किया गया है। वह वर्तमान हाई कमिश्नर प्रणय वर्मा का स्थान लेंगे।

यह नियुक्ति इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि आमतौर पर इस पद पर भारतीय विदेश सेवा (IFS) के करियर राजनयिकों को नियुक्त किया जाता है, लेकिन इस बार एक अनुभवी राजनीतिक नेता को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कौन हैं दिनेश त्रिवेदी?
दिनेश त्रिवेदी का राजनीतिक करियर काफी लंबा और विविध रहा है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी, जिसके बाद वे जनता दल और फिर तृणमूल कांग्रेस से जुड़े। वर्ष 2021 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा।
वे तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और राज्यसभा में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में उन्होंने रेल मंत्री और स्वास्थ्य राज्य मंत्री के रूप में भी कार्य किया।
क्यों अहम है यह नियुक्ति?
ढाका में हालिया घटनाओं और राजनीतिक अस्थिरता के बीच यह नियुक्ति भारत की रणनीतिक सोच को दर्शाती है। वर्ष 2024 में बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल और सत्ता परिवर्तन के बाद से भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव देखने को मिला है। मौजूदा प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार के साथ संबंधों को संतुलित करना भारत के लिए बड़ी चुनौती है।
ऐसे में पश्चिम बंगाल की राजनीति और बांग्ला संस्कृति की गहरी समझ रखने वाले त्रिवेदी को ढाका भेजना एक सोचा-समझा कदम माना जा रहा है। उनके अनुभव से सीमा सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा सहयोग, शरणार्थी मुद्दों और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे संवेदनशील मामलों पर बेहतर समन्वय की उम्मीद है।
नई परंपरा की ओर संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारतीय विदेश नीति में एक नई प्रवृत्ति की शुरुआत हो सकता है, जहां पड़ोसी देशों में केवल करियर डिप्लोमैट्स ही नहीं, बल्कि राजनीतिक अनुभव रखने वाले नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाएंगी।
फिलहाल, ढाका में हालात पर सभी की नजरें टिकी हैं और त्रिवेदी की नियुक्ति को भारत की सक्रिय और रणनीतिक कूटनीति के रूप में देखा जा रहा है।
