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देश में तेजी से बढ़ रही हवाई यात्राओं के बीच फ्लाइट सेफ्टी को लेकर एक बड़ा मुद्दा सामने आया है। Airline Pilots’ Association of India ने विमानन नियामक Directorate General of Civil Aviation को चेतावनी दी है कि पायलट्स की बढ़ती थकान को नजरअंदाज करना यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

ALPA ने अपने पत्र में खासतौर पर FDTL (Flight Duty Time Limitations) नियमों को लेकर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य पायलट्स के काम के घंटों को नियंत्रित करना और उन्हें पर्याप्त आराम देना है, लेकिन इन्हें पूरी तरह लागू करने में लगातार देरी हो रही है। इतना ही नहीं, एयरलाइंस को दी जा रही छूट इन नियमों की प्रभावशीलता को भी कमजोर कर रही है।
पायलट्स का कहना है कि लगातार लंबी ड्यूटी और अपर्याप्त आराम के कारण थकान बढ़ रही है, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। यह स्थिति न सिर्फ पायलट्स की सेहत के लिए खतरनाक है, बल्कि उड़ानों की सुरक्षा पर भी सीधा असर डाल सकती है।
ALPA ने DGCA से मांग की है कि तय समयसीमा के भीतर सभी छूट खत्म की जाएं और FDTL नियमों को सख्ती से लागू किया जाए। इसके अलावा पायलट्स की थकान से जुड़े डेटा को सार्वजनिक करने और नियमित निगरानी प्रणाली लागू करने की भी मांग की गई है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
इस बीच एविएशन इंडस्ट्री में बढ़ते दबाव के संकेत भी साफ दिख रहे हैं। हाल ही में IndiGo द्वारा एक ही दिन में 1000 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द किए जाने की घटना ने सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर दिया। इसके बाद कंपनी के सीईओ पीटर एल्बर्स के इस्तीफे ने हालात की गंभीरता को और भी स्पष्ट कर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते पायलट्स की कार्य स्थितियों में सुधार नहीं किया गया, तो यह समस्या भविष्य में बड़े सुरक्षा संकट का कारण बन सकती है।
हवाई यात्रा की बढ़ती मांग के बीच फ्लाइट सेफ्टी सुनिश्चित करने के लिए पायलट्स की थकान को गंभीरता से लेना अब अनिवार्य हो गया है। DGCA के सामने चुनौती है कि वह जल्द और प्रभावी कदम उठाकर इस जोखिम को कम करे।
