आवाज़ प्लस | विशेष रिपोर्ट
सेना से सिनेमा तक: बिक्रमजीत कंवरपाल की प्रेरणादायक कहानी, महामारी ने छीनी जिंदगी
देश की सेवा से लेकर पर्दे पर दमदार मौजूदगी तक, मेजर से अभिनेता बने बिक्रमजीत कंवरपाल की कहानी साहस, अनुशासन और जुनून का अद्भुत उदाहरण है। 13 साल तक भारतीय सेना में सेवाएं देने वाले कंवरपाल ने सियाचिन जैसे कठिन इलाकों में तैनाती के दौरान अपनी बहादुरी का परिचय दिया। लेकिन दिल में छिपा अभिनय का सपना उन्हें अंततः मायानगरी मुंबई तक ले आया।

आर्मी बैकग्राउंड, अनुशासन भरी परवरिश
हिमाचल प्रदेश के सोलन से ताल्लुक रखने वाले बिक्रमजीत कंवरपाल एक सैन्य परिवार से आते थे। उनके पिता मेजर द्वारका नाथ कंवरपाल ‘कीर्ति चक्र’ से सम्मानित अधिकारी थे। बचपन से ही सैन्य अनुशासन में पले-बढ़े कंवरपाल ने लॉरेंस स्कूल, सनावर से पढ़ाई की और बाद में भारतीय सेना की प्रतिष्ठित ‘हॉडसन्स हॉर्स’ रेजिमेंट में कमीशन हासिल किया।
34 की उम्र में शुरू किया नया सफर
आर्मी में 13 साल सेवा देने के बाद, 34 साल की उम्र में उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा। साल 2003 में पूजा भट्ट की फिल्म पाप से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और धीरे-धीरे इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना ली।
बिना ट्रेनिंग के बने दमदार अभिनेता
बिक्रमजीत कंवरपाल उन चुनिंदा कलाकारों में थे जिन्हें एक्टिंग सीखने के लिए किसी औपचारिक प्रशिक्षण की जरूरत नहीं पड़ी। उन्होंने रॉकेट सिंह, कॉर्पोरेट और मर्डर 2 जैसी फिल्मों में अपने किरदारों से गहरी छाप छोड़ी। वहीं स्पेशल ऑप्स, योर ऑनर, अदालत, 24 और भौकाल जैसी वेब सीरीज और टीवी शोज में भी उनका अभिनय सराहा गया।
महामारी ने छीनी एक प्रतिभाशाली कलाकार की जान
कोरोना महामारी के दौरान इस प्रतिभाशाली अभिनेता का निधन हो गया, जिससे फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई। उनका जाना न सिर्फ एक कलाकार का नुकसान था, बल्कि एक ऐसे शख्स का भी, जिसने दो अलग-अलग क्षेत्रों—सेना और सिनेमा—में अपनी पहचान बनाई।
बिक्रमजीत कंवरपाल की जिंदगी इस बात का उदाहरण है कि जुनून और अनुशासन के साथ कोई भी व्यक्ति अपनी राह खुद बना सकता है। सेना के मैदान से लेकर कैमरे के सामने तक, उन्होंने हर भूमिका को पूरी ईमानदारी से निभाया—और यही उन्हें एक सच्चा “टैलेंट का खजाना” बनाता है।
