69000 शिक्षक भर्ती विवाद: अभ्यर्थियों ने घेरा केशव प्रसाद मौर्य का आवास, पुलिस ने हिरासत में लेकर भेजा इको गार्डन

उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती का विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया में न्याय न मिलने से नाराज अभ्यर्थियों ने रविवार को एक बार फिर लखनऊ में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव किया।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई न होने पर भड़के अभ्यर्थी

अभ्यर्थियों का गुस्सा इस बार सुप्रीम कोर्ट में समय पर सुनवाई न होने से भड़का। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए केशव मौर्य के आवास के बाहर धरना शुरू कर दिया। नाराज अभ्यर्थी लगातार “केशव चाचा न्याय करो” के नारे लगाते रहे।

पुलिस ने हिरासत में लेकर भेजा इको गार्डन

स्थिति बिगड़ने से पहले ही पुलिस ने सख्ती दिखाई और सभी अभ्यर्थियों को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया, जहां उन्हें धरना देने की अनुमति दी गई थी। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।

अभ्यर्थियों का आरोप – सरकार कर रही है जानबूझकर देरी

धरना दे रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि लखनऊ हाई कोर्ट की डबल बेंच ने 13 अगस्त 2024 को आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने नियमों के अनुसार इन्हें नियुक्ति दिए जाने का आदेश दिया था।

लेकिन अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार ने फैसले का पालन करने के बजाय इसे लटकाए रखा, जिसके चलते मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। उनका कहना है कि सरकार के पास पर्याप्त समय था, लेकिन उसने जानबूझकर इस प्रक्रिया को टाला।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल का बयान

धरना का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने कहा –
“वर्ष 2018 में भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। जब परिणाम आया तो व्यापक स्तर पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ। उन्हें नौकरी देने से वंचित कर दिया गया। लंबे संघर्ष और न्यायिक प्रक्रिया के बाद हाई कोर्ट ने हमारे पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन सरकार हीला-हवाली कर रही है।”

उन्होंने आगे कहा कि 2 सितंबर को भी अभ्यर्थियों ने केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव किया था। तब डिप्टी सीएम ने त्वरित न्याय का आश्वासन दिया था और अभ्यर्थियों से मुलाकात भी की थी। लेकिन इसके बावजूद अधिकारियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

अभ्यर्थियों की नाराज़गी

अभ्यर्थियों ने कहा कि वे पिछड़े, दलित और गरीब वर्ग से आते हैं। सरकार और अधिकारियों के इस रवैये से वे बेहद निराश और हताश हैं। उनका कहना है कि जिस काम को कुछ दिनों में निपटाया जा सकता था, उसे सालों से टालकर उनका भविष्य अंधेरे में धकेला जा रहा है।

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