समाचार (आवाज़ प्लस):
वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच 45 दिन के संभावित सीजफायर को लेकर बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थ देशों के बीच इस प्रस्ताव पर बातचीत चल रही है, जिससे युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने का रास्ता निकल सकता है।

सूत्रों के अनुसार, इस वार्ता में पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच टेक्स्ट मैसेज के जरिए भी संवाद जारी है।
प्रस्तावित समझौते को दो चरणों में लागू करने की योजना है। पहले चरण में 45 दिनों का सीजफायर होगा, जिसके दौरान स्थायी शांति के लिए बातचीत की जाएगी। दूसरे चरण में युद्ध समाप्त करने के लिए अंतिम समझौता किया जा सकता है।
हालांकि, कूटनीतिक प्रयासों के बीच जमीनी हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले तेज कर दिए हैं। सोमवार सुबह तेहरान के दक्षिण-पश्चिम में एक रिहायशी इमारत पर हुए हवाई हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा, तेहरान की प्रतिष्ठित शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी को भी निशाना बनाया गया, जिससे इमारतों और पास स्थित गैस वितरण केंद्र को भारी नुकसान पहुंचा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस यूनिवर्सिटी को ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े होने के कारण निशाना बनाया गया। वहीं, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और अन्य सुरक्षा बल लगातार हमलों के चलते अपने ठिकाने बदल रहे हैं।
दूसरी ओर, ईरान के पूर्व विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप के अल्टीमेटम की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी रक्षा करने में सक्षम है और किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।
इस बीच, क्षेत्र में तनाव का असर अन्य देशों पर भी दिखाई दे रहा है। सऊदी अरब ने दो ड्रोन मार गिराने का दावा किया है, जबकि अबू धाबी में एक व्यक्ति हमले के दौरान घायल हो गया। इजरायल के मध्य हिस्से में भी ईरानी हमलों के बाद कई जगहों पर मिसाइलें गिरी हैं, जिससे नुकसान और हताहतों की खबरें सामने आई हैं।
गाजा पट्टी में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हालिया संघर्षविराम के बाद से 700 से अधिक फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है।
कुल मिलाकर, एक ओर जहां सीजफायर की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर लगातार हो रहे हमले स्थिति को और जटिल बना रहे हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस युद्ध को थाम पाएंगे या संघर्ष और गहराएगा।
