नई दिल्ली:
पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे भारतीय एलपीजी जहाजों की वापसी का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में भारत का एक और एलपीजी कैरियर ‘ग्रीन आशा’ सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुका है। अब इस संवेदनशील इलाके में केवल एक जहाज ‘जग विक्रम’ ही बचा है, जिसकी सुरक्षित वापसी का इंतजार किया जा रहा है।

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग की रिपोर्ट के अनुसार, 3 अप्रैल को ‘ग्रीन सान्वी’ के सफलतापूर्वक पार होने के बाद रविवार को ‘ग्रीन आशा’ ने भी इस खतरनाक रास्ते को पार कर लिया। इसके बाद अब ‘जग विक्रम’ ही एकमात्र जहाज है, जो अभी भी इस क्षेत्र में फंसा हुआ है और भारतीय नौसेना के निर्देशों का इंतजार कर रहा है।
जल्द भारत पहुंचेगा ‘ग्रीन सान्वी’
करीब 46,655 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर लौट रहा ‘ग्रीन सान्वी’ 7 अप्रैल को गुजरात के दहेज (भरूच) पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, BW TYR नामक एलपीजी कैरियर मुंबई के बाहरी बंदरगाह पर ‘शिप-टू-शिप’ ट्रांसफर के जरिए अपना माल उतार रहा है। इसके अलावा, BW ELM को 4 अप्रैल को चेन्नई के एन्नोर बंदरगाह की ओर मोड़ दिया गया था।
पहले भी पहुंच चुके हैं कई जहाज
पिछले सप्ताह ‘जग वसंत’ 47,612 मीट्रिक टन एलपीजी के साथ कांडला (गुजरात) पहुंचा, जबकि ‘पाइन गैस’ ने न्यू मैंगलोर में 45,000 मीट्रिक टन एलपीजी की आपूर्ति की।
खाड़ी क्षेत्र में अब भी कई भारतीय जहाज मौजूद
रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल:
- 16 भारतीय जहाज फारसी खाड़ी में
- 4 जहाज ओमान की खाड़ी में
- 1 जहाज अदन की खाड़ी में
- 2 जहाज लाल सागर में मौजूद हैं
इनमें से पांच जहाज शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के हैं। वहीं, पश्चिम एशिया जाने वाले चार जहाज भारत के बड़े बंदरगाहों पर रुके हुए हैं।
20,000 भारतीय नाविकों की मौजूदगी
खाड़ी क्षेत्र में इस समय करीब 20,000 भारतीय नाविक तैनात हैं। इनमें से:
- 528 नाविक भारतीय झंडे वाले जहाजों पर
- 433 नाविक फारसी खाड़ी में
- 95 नाविक ओमान की खाड़ी में कार्यरत हैं
5 अप्रैल तक विभिन्न शिपिंग कंपनियों ने 1,479 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।
स्थिति पर सरकार की नजर
सरकार और भारतीय नौसेना पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। ‘जग विक्रम’ की सुरक्षित वापसी के साथ ही इस संकट से जुड़ी सबसे बड़ी चिंता भी खत्म होने की उम्मीद है।
(आवाज़ प्लस)
