आवाज़ प्लस | विशेष रिपोर्ट
मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट के बीच रूस ने बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए भारत समेत दक्षिण एशियाई देशों को सस्ती LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की पेशकश की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस अपनी गैस पर करीब 40% तक की छूट देने को तैयार है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है।

फरवरी के अंत से क्षेत्र में बढ़े तनाव के चलते तेल और गैस सप्लाई प्रभावित हुई है। खाड़ी क्षेत्र के कई गैस प्लांट्स पर हमलों की खबरें सामने आई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। ऐसे समय में रूस की यह पेशकश उसे एक मजबूत वैकल्पिक सप्लायर के रूप में स्थापित कर सकती है।
सस्ती गैस के साथ छिपी शर्तें
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह LNG उन रूसी प्रोजेक्ट्स से आ रही है जिन पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हैं। इस गैस को चीन और रूस की मध्यस्थ कंपनियों के जरिए बेचा जा रहा है। इतना ही नहीं, गैस के स्रोत को छुपाने के लिए इसे ओमान या नाइजीरिया जैसे देशों से आया हुआ दिखाने की रणनीति भी अपनाई जा सकती है।
भारत के लिए अवसर या जोखिम?
भारत के लिए यह ऑफर आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है, लेकिन इसके साथ कूटनीतिक जोखिम भी जुड़े हैं। अब तक भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ऐसी डील्स से दूरी बनाए रखी है। यदि भारत इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो उसे अमेरिका की संभावित प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ सकता है।
ऊर्जा संकट गहराया
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर असर और सप्लाई में कमी के चलते वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा गया है। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम की खबरें हैं, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
एशिया बन सकता है बड़ा खरीदार
ऊर्जा आयात पर निर्भर एशियाई देशों के लिए सस्ती LNG एक आकर्षक विकल्प बनकर उभर रही है। फिलहाल चीन इस तरह की गैस खरीद रहा है, लेकिन आने वाले समय में भारत समेत अन्य देश भी इसमें रुचि दिखा सकते हैं।
(आवाज़ प्लस)
