Iran-US War: शांति वार्ता पर संशय, चीन की चाल से बढ़ा तनाव; ईरान को एयर डिफेंस देने की तैयारी

आवाज़ प्लस | अंतरराष्ट्रीय डेस्क

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच शनिवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति वार्ता होने जा रही है, लेकिन युद्ध विराम की संभावनाओं पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने इस वार्ता की संभावित असफलता को भांपते हुए ईरान को नए एयर डिफेंस सिस्टम भेजने की तैयारी शुरू कर दी है।


🔴 खुफिया रिपोर्ट से बढ़ी चिंता

सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी एजेंसियों को जानकारी मिली है कि चीन आने वाले कुछ हफ्तों में ईरान को आधुनिक एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम उपलब्ध करा सकता है। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब चीन खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा था।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये सिस्टम ईरान तक पहुंचते हैं, तो अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए खतरा काफी बढ़ सकता है।


🛰️ तीसरे देशों के जरिए होगी सप्लाई

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन इन हथियारों को सीधे न भेजकर तीसरे देशों के रास्ते ईरान पहुंचाने की योजना बना रहा है। इसमें खास तौर पर MANPADs (कंधे से दागे जाने वाले मिसाइल सिस्टम) शामिल हैं, जो कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों के लिए बेहद खतरनाक माने जाते हैं।


⚠️ चीन ने आरोपों को किया खारिज

वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। प्रवक्ता ने कहा कि चीन किसी भी संघर्षरत पक्ष को हथियार नहीं देता और वह अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करता है। साथ ही अमेरिका पर बेबुनियाद आरोप लगाने का भी आरोप लगाया।


✈️ F-15 गिराए जाने पर ट्रंप का संकेत

हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि ईरान ने अमेरिकी F-15 फाइटर जेट को कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल से मार गिराया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वह सिस्टम चीनी था या नहीं, लेकिन ट्रंप का इशारा चीन की ओर माना जा रहा है।


🌍 कूटनीतिक समीकरण और जटिल हुए

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ट्रंप का प्रस्तावित चीन दौरा और शी जिनपिंग के साथ उनकी मुलाकात भी अहम मानी जा रही है। वहीं, व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि सीजफायर वार्ता के दौरान अमेरिका और चीन के बीच उच्च-स्तरीय बातचीत भी जारी रही।


इस्लामाबाद में हो रही शांति वार्ता के बीच चीन की संभावित सैन्य मदद ने हालात को और जटिल बना दिया है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास युद्ध को रोक पाएंगे या वैश्विक तनाव और गहराएगा।


 

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