आवाज़ प्लस | विशेष रिपोर्ट
पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे मिडिल ईस्ट को एक बड़े भू-राजनीतिक संकट की ओर धकेल दिया है। United States Central Command (CENTCOM) ने ऐलान किया है कि सोमवार सुबह 10 बजे (ET) से ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी लागू की जाएगी। यह फैसला पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर लिया गया, जो इस्लामाबाद में चली 21 घंटे लंबी उच्चस्तरीय वार्ता के विफल होने के बाद सामने आया है।

इस घटनाक्रम का असर वैश्विक बाजारों पर तुरंत देखने को मिला। अमेरिकी कच्चा तेल करीब 8% उछलकर 104.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 102.29 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित बाधा और आपूर्ति संकट के डर से कीमतों में तेज उछाल आया है।
इसी बीच, लेबनान में हालात और ज्यादा विस्फोटक हो गए हैं। हिज़्बुल्लाह और इजरायल के बीच संघर्ष तेज हो गया है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि “हिज़्बुल्लाह के पूरी तरह समाप्त होने तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।” इजरायल की ओर से लेबनान में कई ठिकानों पर भीषण हमले किए गए हैं, जिससे क्षेत्र में युद्ध का खतरा और बढ़ गया है।
दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग के रूप में खुला रखने की अपील की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ने इस नाकेबंदी के लिए ऑस्ट्रेलिया से किसी सैन्य सहयोग की मांग नहीं की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव और बढ़ता है, तो इसका असर न केवल मिडिल ईस्ट बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
स्थिति पर नजर बनी हुई है, और आने वाले दिन बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।
