नई दिल्ली: महिला आरक्षण पर सियासी घमासान तेज, 50% सीट बढ़ोतरी के फॉर्मूले पर मंथन

नई दिल्ली में महिला आरक्षण को लेकर सियासत गरमा गई है। केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा के लिए 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें तीन दिन तक तीखी बहस और हंगामे के आसार हैं। सरकार का लक्ष्य है कि साल 2029 से महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का लाभ लागू कर दिया जाए।

हर राज्य में 50% सीट बढ़ाने की तैयारी
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था के तहत हर राज्य में मौजूदा लोकसभा सीटों में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जा सकती है। यह बढ़ोतरी पूरी तरह प्रोपोर्शनल आधार पर होगी, ताकि किसी भी राज्य के साथ अन्याय न हो। सरकार का दावा है कि बिल की भाषा स्पष्ट है और संसद में इसे विस्तार से समझाया जाएगा।

डिलिमिटेशन को लेकर विपक्ष के आरोप
विपक्षी दल महिला आरक्षण के साथ डिलिमिटेशन को जोड़कर सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उनका आरोप है कि सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना के पीछे राजनीतिक मंशा है। खासकर दक्षिण भारत के राज्यों को आशंका है कि इससे उत्तर भारत का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा और उनका हिस्सा कम हो जाएगा।

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने अपनी पार्लियामेंट्री स्ट्रैटजी कमेटी की बैठक बुलाई है। पार्टी का कहना है कि महिला आरक्षण का समर्थन किया जाएगा, लेकिन जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिणी राज्यों के हितों से समझौता नहीं होना चाहिए।

दक्षिणी राज्यों की कड़ी प्रतिक्रिया
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र ने मनमानी की तो जनता सड़क पर उतर सकती है। वहीं तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भी इस मुद्दे पर बड़े विरोध के संकेत दिए हैं।

सरकार ने दिया भरोसा, समाधान का दावा
सरकार का कहना है कि सीटों की अंतिम संख्या और वितरण का निर्णय डिलिमिटेशन कमीशन करेगा और यह पूरी तरह अनुपातिक आधार पर होगा। साथ ही, दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को भी ध्यान में रखा गया है।

फिलहाल, महिला आरक्षण के बहाने संसद में सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव तेज होता नजर आ रहा है। आने वाले विशेष सत्र में इस मुद्दे पर देश की राजनीति का रुख तय हो सकता है।

आवाज़ प्लस के लिए यह एक अहम खबर है, जो न सिर्फ महिला सशक्तिकरण बल्कि देश के राजनीतिक संतुलन से भी सीधे तौर पर जुड़ी हुई है।

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