देवास: कलेक्टर के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, बाबुओं ने बेची आदिवासी जमीन

देवास कलेक्ट्रेट में एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां कलेक्टर के नाम से फर्जी आदेश जारी कर आदिवासी जमीनों की अवैध बिक्री की जा रही थी। इस मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक, इस पूरे घोटाले में एडीएम कार्यालय का रीडर संजीव जाटव, नजूल शाखा का बाबू रमेश लोबानिया, तहसील का बाबू जितेंद्र भद्रे और खातेगांव क्षेत्र का महेंद्र कुशवाह एक दलाल के साथ मिलकर संगठित तरीके से काम कर रहे थे। आरोप है कि ये लोग कलेक्टर की फर्जी अनुमति तैयार कर आदिवासी जमीनों का अवैध अंतरण करा रहे थे।

रजिस्ट्री के दौरान हुआ खुलासा
मामले का भंडाफोड़ उस समय हुआ जब एक व्यक्ति जमीन की रजिस्ट्री कराने पहुंचा। दस्तावेजों में गड़बड़ी की आशंका होने पर जिला पंजीयक ने मामले की जानकारी कलेक्टर ऋतुराज सिंह को दी। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर जांच शुरू की गई, जिसमें फर्जी सील और हस्ताक्षर के जरिए अनुमति जारी करने का बड़ा खेल सामने आया।

बताया जा रहा है कि आदिवासी जमीन बेचने के लिए कलेक्टर की अनुमति अनिवार्य होती है। इसी नियम का दुरुपयोग करते हुए आरोपियों ने नकली आदेश तैयार कर जमीनों की खरीद-फरोख्त कराई।

चार आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी
बीएनपी थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों—संजीव जाटव, रमेश लोबानिया, जितेंद्र भद्रे और महेंद्र कुशवाह—को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश जारी है।

प्रशासन सतर्क, और खुलासों की संभावना
इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासन अलर्ट मोड में है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

आवाज़ प्लस के लिए यह एक बड़ी खबर है, जो न सिर्फ सिस्टम में मौजूद खामियों को उजागर करती है, बल्कि आदिवासी जमीनों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती है।

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