कोलकाता/दार्जिलिंग:
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी माहौल तेज हो गया है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने दार्जिलिंग में गोरखा मुद्दे को चुनावी एजेंडा के केंद्र में रखते हुए बड़ा ऐलान किया है। केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah ने वीडियो संदेश के जरिए गोरखा समुदाय को भरोसा दिलाया कि राज्य में बीजेपी सरकार बनने पर उनकी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाएगा।

गोरखा नेताओं पर दर्ज केस होंगे वापस
खराब मौसम के कारण निर्धारित कार्यक्रम में शामिल न हो पाने पर अमित शाह ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि गोरखा आंदोलन के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं पर दर्ज सभी पुलिस मामलों को सत्ता में आते ही वापस लिया जाएगा। उन्होंने इसे न्याय और विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
जल्द समाधान का वादा
शाह ने कहा कि दार्जिलिंग और आसपास के क्षेत्रों की समस्याओं को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया है, लेकिन बीजेपी सरकार बनने के बाद गोरखा मुद्दे का शीघ्र समाधान उनकी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल होगा। उन्होंने 21 अप्रैल को सुकना (कुर्सियोंग) में प्रस्तावित जनसभा में विस्तृत विकास योजनाओं की घोषणा करने की भी बात कही।
गोरखालैंड की मांग फिर चर्चा में
दार्जिलिंग पहाड़ियों में रहने वाले नेपाली भाषी भारतीयों की अलग गोरखालैंड राज्य की मांग लंबे समय से राजनीति के केंद्र में रही है। 2011 में गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (GTA) के गठन के बावजूद क्षेत्र में असंतोष बना रहा और 2017 तक आंदोलन जारी रहे।
राजनीतिक समीकरण बदले
इस चुनाव में सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress ने अनित थापा के नेतृत्व वाली भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (BGPM) के साथ गठबंधन किया है और दार्जिलिंग, कालिम्पोंग व कुर्सियोंग सीटें सहयोगी दल को दी हैं। वहीं बीजेपी ने एक बार फिर बिमल गुरुंग का समर्थन हासिल किया है और इस बार क्षेत्र में सीधे चुनाव मैदान में उतर रही है।
चुनाव कार्यक्रम
दार्जिलिंग में पहले चरण के तहत 23 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होगी। मतगणना 4 मई को की जाएगी।
दार्जिलिंग का गोरखा मुद्दा एक बार फिर चुनावी राजनीति के केंद्र में है। बीजेपी इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाकर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जबकि टीएमसी भी गठबंधन के जरिए जवाबी रणनीति तैयार कर चुकी है। अब देखना होगा कि गोरखा समुदाय किसके वादों पर भरोसा जताता है।
