नई दिल्ली/दोहा: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। कतर ने स्पष्ट किया है कि वह भारत को गैस और तेल की सप्लाई में किसी भी तरह की कमी नहीं आने देगा। यह आश्वासन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

दरअसल, कतर के ऊर्जा मंत्री साद शेरिदा अल-काबी और भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बीच दोहा में अहम बैठक हुई। इस बैठक में ऊर्जा सहयोग, व्यापार, निवेश और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद भारत ने क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता लौटने की उम्मीद जताई।
कतर ने दिया भरोसा
कतर ने दोहराया कि वह भारत के लिए एक भरोसेमंद ऊर्जा सप्लायर बना रहेगा। दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक बाजार में स्थिरता बनी रहे और ऊर्जा सप्लाई चेन में किसी तरह की बाधा न आए। साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार को निर्बाध जारी रखने की प्रतिबद्धता भी जताई गई।
भारत के लिए क्यों अहम है कतर?
कतर भारत का सबसे बड़ा एलएनजी (LNG) और एलपीजी (LPG) सप्लायर है। भारत को मिलने वाली करीब 45% LNG और 20% LPG सप्लाई कतर से ही होती है। ऐसे में मौजूदा वैश्विक हालात के बीच कतर का यह आश्वासन भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का फोकस
भारत सरकार ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है, ताकि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट का असर देश पर कम से कम पड़े। इसी कड़ी में भारत अपने पड़ोसी देशों की भी मदद कर रहा है। हाल ही में श्रीलंका को पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई की गई, वहीं मॉरिशस के साथ भी ऊर्जा सहयोग को लेकर समझौते की प्रक्रिया जारी है।
बिजली उत्पादन में बढ़त
देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता 531 गीगावॉट के पार पहुंच चुकी है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा का बड़ा योगदान है। सरकार आने वाले समय में नई परियोजनाओं को तेजी से लागू करने की तैयारी में है।मिडिल ईस्ट में तनाव के बावजूद कतर का यह भरोसा भारत के लिए बड़ी राहत है। इससे न केवल ऊर्जा आपूर्ति स्थिर रहने की उम्मीद है, बल्कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत बनी रहेगी।
