सिलीगुड़ी विधानसभा चुनाव 2026: बीजेपी का गढ़ बरकरार रहेगा या TMC करेगी वापसी?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में दार्जिलिंग जिले की सिलीगुड़ी सीट इस बार हाई-प्रोफाइल मुकाबले का केंद्र बनी हुई है। राज्य की 294 विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनाव में सिलीगुड़ी सीट पर पहले चरण में 23 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच सीधा और कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है।

मुख्य उम्मीदवारों में सीधी टक्कर
सिलीगुड़ी सीट से TMC ने अनुभवी नेता गौतम देब को मैदान में उतारा है, जबकि BJP ने मौजूदा विधायक शंकर घोष पर भरोसा जताया है। इसके अलावा CPI(M) के शरदिंदु चक्रवर्ती और कांग्रेस के आलोक धारा भी चुनावी मैदान में हैं, जिससे मुकाबला बहुकोणीय हो गया है।

बीजेपी की मजबूत पकड़, TMC की चुनौती
पिछले चुनावों के नतीजों को देखें तो सिलीगुड़ी सीट पर BJP की पकड़ मजबूत रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में BJP के शंकर घोष ने TMC उम्मीदवार को 35,586 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में भी इस क्षेत्र में BJP ने बढ़त बनाए रखी, जिससे पार्टी का आत्मविश्वास मजबूत हुआ है।
हालांकि, TMC इस बार संगठनात्मक ताकत और स्थानीय मुद्दों के सहारे वापसी की कोशिश में जुटी है।

पीएम मोदी की रैली से तेज हुआ प्रचार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के बाद सिलीगुड़ी में चुनावी माहौल और गर्म हो गया है। रैली में उन्होंने TMC सरकार पर तीखा हमला बोला और महिलाओं के कल्याण सहित कई योजनाओं का वादा किया। इसके बाद BJP कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा है और प्रचार अभियान ने गति पकड़ ली है।

मतदाता समीकरण अहम
2021 के आंकड़ों के अनुसार सिलीगुड़ी में कुल 2,28,406 मतदाता हैं, जिनमें पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर है। इस बार युवा और महिला वोटर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

सिलीगुड़ी का राजनीतिक इतिहास
सिलीगुड़ी सीट का इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। 1951 और 1957 में यह दो सदस्यीय सीट थी, बाद में इसे एक सदस्यीय बना दिया गया। CPI(M) ने यहां सबसे ज्यादा 8 बार जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस ने चार बार कब्जा किया। हाल के वर्षों में TMC और BJP भी इस सीट पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुकी हैं।

क्या कहते हैं समीकरण?
सिलीगुड़ी में इस बार मुकाबला बेहद रोचक है। एक तरफ BJP अपनी पिछली जीत और संगठनात्मक मजबूती के दम पर सीट बचाने की कोशिश में है, तो वहीं TMC स्थानीय मुद्दों और अपने उम्मीदवार के अनुभव के आधार पर वापसी की उम्मीद लगाए बैठी है।

अब देखना यह होगा कि सिलीगुड़ी की जनता इस बार किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है—क्या BJP अपना गढ़ बचा पाएगी या “दीदी” का दांव भारी पड़ेगा।

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