लखनऊ/डेस्क | आवाज़ प्लस
इस्लामाबाद में कूटनीतिक वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अब अमेरिका ने ईरानी जहाजों के खिलाफ नाकेबंदी लागू कर दी है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के निर्देश पर अमेरिकी नौसेना ने इस रणनीतिक जलमार्ग में करीब 15 युद्धपोत तैनात किए हैं। अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान से तेल लेकर निकलने वाले किसी भी टैंकर को रोका जाएगा।
वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने ईरान पर समुद्री यातायात बाधित कर “आर्थिक आतंकवाद” फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान अपनी गतिविधियां नहीं रोकता, तो अमेरिका उसके सभी समुद्री रास्तों को बंद करने से पीछे नहीं हटेगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी निगरानी में हाल ही में 34 जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज से गुजरे हैं। उन्होंने ईरान के कदम को “गैर-जिम्मेदाराना” और “बेवकूफी भरा” बताया।
दूसरी ओर, ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ ने चेतावनी दी है कि होर्मुज में किसी भी तरह की नाकेबंदी का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा और इससे वैश्विक बाजार में भारी उथल-पुथल हो सकती है।
इसी बीच, तनावपूर्ण माहौल के बावजूद एक भारतीय जहाज के इस मार्ग से गुजरने की खबर सामने आई है। भारत के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से आने वाले तेल पर निर्भर करता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता यह टकराव अब वैश्विक संकट का रूप लेता दिख रहा है। यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका असर न सिर्फ तेल की कीमतों पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर रूप से पड़ सकता है।
आवाज़ प्लस के लिए रिपोर्ट।
