यूपी में श्रमिकों की सैलरी बढ़ी: 3000 रुपये तक इजाफा, नोएडा प्रदर्शन के बीच योगी सरकार का बड़ा फैसला

लखनऊ | आवाज़ प्लस

उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिकों को बड़ी राहत देते हुए न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। नोएडा में चल रहे श्रमिकों के प्रदर्शन के बीच लिया गया यह फैसला हजारों फैक्ट्री कर्मचारियों के लिए राहतभरा साबित होगा। सरकार द्वारा गठित उच्च-स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में वेतन में करीब 3000 रुपये तक की वृद्धि की गई है। नया वेतनमान 1 अप्रैल से लागू माना जाएगा।

सरकार ने सभी औद्योगिक इकाइयों और कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे संशोधित न्यूनतम मजदूरी के अनुसार ही कर्मचारियों को भुगतान सुनिश्चित करें।


📍 नोएडा और गाजियाबाद के श्रमिकों के लिए नई मजदूरी

गौतमबुद्धनगर (नोएडा) और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों का वेतन 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये कर दिया गया है।
अर्धकुशल श्रमिकों की सैलरी 12,445 रुपये से बढ़कर 15,059 रुपये हो गई है।
वहीं कुशल कामगारों को अब 13,940 रुपये के बजाय 16,868 रुपये प्रति माह मिलेंगे।

इन वेतनमानों में महंगाई भत्ता भी शामिल किया गया है।


🏙️ नगर निगम वाले जिलों में संशोधित वेतन

प्रदेश के नगर निगम वाले जिलों में अकुशल श्रमिकों की मजदूरी 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,006 रुपये कर दी गई है।
अर्धकुशल श्रमिकों को अब 14,306 रुपये और कुशल कामगारों को 16,025 रुपये मासिक वेतन मिलेगा।


🌆 अन्य जिलों के लिए वेतनमान

अन्य जिलों में अकुशल मजदूरों का वेतन बढ़ाकर 12,356 रुपये किया गया है।
अर्धकुशल श्रमिकों को अब 13,591 रुपये और कुशल श्रमिकों को 15,224 रुपये प्रति माह मिलेंगे।


❗ ₹20,000 न्यूनतम वेतन की खबर पर सरकार का स्पष्टीकरण

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि ₹20,000 न्यूनतम वेतन लागू किए जाने की खबरें पूरी तरह भ्रामक और निराधार हैं।

सरकार के अनुसार, केंद्र स्तर पर नई श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के तहत राष्ट्रीय “फ्लोर वेज” तय करने की प्रक्रिया जारी है। इसका उद्देश्य देशभर में श्रमिकों के लिए एक समान न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करना है।

राज्य सरकार ने बताया कि इस विषय पर नियोक्ता संगठनों और श्रमिक संगठनों से लगातार विचार-विमर्श किया जा रहा है, ताकि एक संतुलित और व्यावहारिक निर्णय लिया जा सके।


नोएडा में श्रमिकों के विरोध के बीच लिया गया यह निर्णय सरकार की श्रमिक हितैषी नीति को दर्शाता है। बढ़ी हुई मजदूरी से प्रदेश के लाखों श्रमिकों की आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद है।

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