नोएडा | आवाज़ प्लस
नोएडा में फैक्ट्री श्रमिकों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच में बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि प्रदर्शन को संगठित और उग्र बनाने के लिए QR कोड के जरिए रातों-रात लोगों को WhatsApp ग्रुप्स में जोड़ा गया था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, अलग-अलग नामों से बनाए गए कई WhatsApp ग्रुप सक्रिय थे, जिनमें मजदूर आंदोलन के नाम पर लोगों को जोड़ा गया। इन ग्रुप्स में कथित तौर पर भड़काऊ और उकसाने वाले संदेश लगातार साझा किए जा रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में ऐसे कई डिजिटल सबूत मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि हिंसा पूर्व नियोजित हो सकती है।
भड़काऊ मैसेज से भड़की भीड़
सूत्रों के मुताबिक, इन ग्रुप्स के माध्यम से प्रदर्शन को उग्र करने के निर्देश दिए गए थे। मैसेज के जरिए लोगों को एकजुट कर मौके पर पहुंचने और विरोध को तेज करने के लिए उकसाया गया। पुलिस अब इन ग्रुप्स के एडमिन और सक्रिय सदस्यों की पहचान कर रही है।
सीसीटीवी में कैद हुई हिंसा
इसी बीच, सेक्टर-63 के पास स्थित एक फैक्ट्री का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कुछ लोग जबरन फैक्ट्री का गेट तोड़कर अंदर घुसते हैं और जमकर तोड़फोड़ करते हैं। फुटेज में मौजूद ऑडियो में फैक्ट्री के कर्मचारी यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि “ये लोग हमारे वर्कर नहीं हैं, बाहर से आए हुए हैं।”
पुलिस की कार्रवाई तेज
नोएडा पुलिस अलग-अलग सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल सबूतों के आधार पर उपद्रवियों की पहचान में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है।
प्रारंभिक जांच से यह साफ हो रहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर भीड़ को संगठित किया गया और हालात को हिंसक बनाया गया। ऐसे में अब जांच एजेंसियों की नजर डिजिटल नेटवर्क और इसके पीछे सक्रिय लोगों पर केंद्रित हो गई है।
