‘खूसखोर पंडत’ विवाद के बीच नेटफ्लिक्स ने हटाई मनोज बाजपेयी की फिल्म, धार्मिक भावनाओं को लेकर बढ़ा बवाल

ओटीटी की दुनिया में मनोज बाजपेयी का नाम भरोसे का पर्याय माना जाता है। उनकी फिल्में और वेब सीरीज अक्सर दर्शकों की कसौटी पर खरी उतरती हैं, यही वजह है कि उनके हर नए प्रोजेक्ट पर फैंस की खास नजर रहती है। लेकिन इस बार उनका अपकमिंग प्रोजेक्ट ‘खूसखोर पंडत’ रिलीज से पहले ही बड़े विवाद में घिर गया है।

फिल्म के टाइटल और कंटेंट को लेकर उठे विरोध के बाद अब बड़ा कदम सामने आया है—नेटफ्लिक्स ने इस फिल्म को अपनी लिस्टिंग से हटा दिया है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

‘खूसखोर पंडत’ में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाते नजर आने वाले थे। जैसे ही फिल्म का नाम और शुरुआती जानकारी सामने आई, सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं।

कई राजनीतिक नेताओं और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया कि—

  • फिल्म का नाम ब्राह्मण समाज को निशाना बनाता है,
  • इससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है,
  • और यह एक पूरे वर्ग को नकारात्मक रूप में पेश करता है।

मामला इतना बढ़ गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर #KhushkhorPandit ट्रेंड करने लगा और यूजर्स ने फिल्म के बहिष्कार की मांग शुरू कर दी।

मेकर्स और मनोज बाजपेयी की सफाई

विवाद गहराने के बाद फिल्म निर्माताओं और मनोज बाजपेयी की ओर से बयान जारी किया गया। इसमें कहा गया कि—

  • किसी भी समुदाय या धर्म को ठेस पहुंचाने का उनका कोई इरादा नहीं है,
  • फिल्म से जुड़ी सभी प्रमोशनल सामग्री फिलहाल हटा दी गई है,
  • और दर्शकों की भावनाओं का पूरा सम्मान किया जाएगा।

इसके बावजूद विरोध थमता नजर नहीं आया।

नेटफ्लिक्स ने क्यों हटाई फिल्म की लिस्टिंग?

इसी बीच सोशल मीडिया यूजर्स ने नोटिस किया कि नेटफ्लिक्स से फिल्म की लिस्टिंग गायब हो गई है।
हालांकि प्लेटफॉर्म की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि बढ़ते विवाद और राजनीतिक दबाव के चलते यह कदम उठाया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, अब दो संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है—

1-फिल्म के नाम में बदलाव किया जा सकता है,

2-या फिर कंटेंट में जरूरी संशोधन के बाद ही इसे दोबारा ओटीटी पर लाया जाएगा।

पहले भी उठ चुकी है बैन की मांग

इस विवाद के दौरान कुछ राजनीतिक हस्तियों ने केंद्र सरकार से फिल्म पर बैन लगाने की मांग भी की थी। आरोप लगाया गया कि ऐसे टाइटल समाज में गलत संदेश फैलाते हैं और सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा सकते हैं।

आगे क्या?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि—

  • क्या ‘खूसखोर पंडत’ नए नाम के साथ लौटेगी?
  • क्या मेकर्स कंटेंट में बदलाव करेंगे?
  • या फिर यह प्रोजेक्ट लंबे समय के लिए ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

फिलहाल नेटफ्लिक्स द्वारा लिस्टिंग हटाए जाने से साफ है कि मामला गंभीर है और अंतिम फैसला आने में वक्त लग सकता है।

निष्कर्ष

मनोज बाजपेयी जैसे सशक्त अभिनेता की फिल्म का इस तरह विवादों में घिरना ओटीटी इंडस्ट्री के लिए भी एक बड़ा संकेत है। आज के दौर में कंटेंट के साथ-साथ शीर्षक और सामाजिक संवेदनशीलता भी उतनी ही अहम हो गई है। अब देखना दि

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