चेक बाउंस केस में बड़ा झटका: दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर अभिनेता राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में किया सरेंडर, जानिए पूरा मामला

बॉलीवुड के चर्चित हास्य अभिनेता राजपाल यादव को गुरुवार शाम तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण करना पड़ा। यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के सख्त आदेश के बाद हुई, जिसमें अदालत ने साफ कहा था कि अभिनेता को तुरंत सरेंडर करना होगा और पेशे या फिल्मी पहचान के आधार पर कोई विशेष रियायत नहीं दी जा सकती।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, राजपाल यादव ने करीब शाम 4 बजे जेल अधीक्षक के सामने आत्मसमर्पण किया। जेल प्रशासन ने बताया कि आगे की सभी कानूनी औपचारिकताएं जेल मैनुअल के तहत पूरी की जाएंगी।

⚖️ कोर्ट क्यों हुआ सख्त?

दरअसल, 2 फरवरी को दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने राजपाल यादव को 4 फरवरी तक आत्मसमर्पण करने का समय दिया था। लेकिन तय तारीख तक सरेंडर न करने पर अदालत ने कड़ी नाराज़गी जताई।

कोर्ट ने कहा—

“अदालत के आदेशों की अनदेखी कानून के प्रति सम्मान की कमी दर्शाती है।”

इसके साथ ही हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि आत्मसमर्पण किए बिना आगे कोई सुनवाई नहीं होगी। इसके बाद मजबूरन 5 फरवरी को राजपाल यादव को जेल जाना पड़ा।

💰 क्या है पूरा मामला?

यह मामला राजपाल यादव की बतौर निर्देशक पहली फिल्म ‘अता-पता लापता’ से जुड़ा है।

  • साल 2010 में फिल्म बनाने के लिए उन्होंने मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।
  • फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
  • इसके बाद वह कर्ज की रकम वापस नहीं कर पाए।

कर्ज चुकाने के लिए दिए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके चलते उनके खिलाफ निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट 1881 की धारा 138 के तहत केस दर्ज हुआ।

निचली अदालत ने अप्रैल 2018 में उन्हें दोषी ठहराते हुए 6 महीने की सजा सुनाई।
जनवरी 2019 में सत्र न्यायालय ने भी इस फैसले को बरकरार रखा।

बाद में मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा, जहां 2024 में सजा पर रोक इस शर्त पर लगाई गई कि वे बकाया रकम चुका देंगे।
लेकिन अदालत के अनुसार—

  • राजपाल यादव ने कई बार भुगतान का आश्वासन दिया,
  • दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में भी रकम लौटाने का वादा किया,
  • मगर तय समयसीमा में पैसे जमा नहीं किए।

इसी को अदालत ने गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया और सरेंडर का आदेश दे दिया।

📌 कोर्ट की टिप्पणी

लाइव लॉ के मुताबिक हाई कोर्ट ने कहा—

“याचिकाकर्ता का आचरण निंदनीय है। बार-बार आश्वासन देने के बावजूद अदालत के आदेशों का पालन नहीं किया गया।”

⚠️ पहले भी जा चुके हैं जेल

यह पहला मौका नहीं है जब राजपाल यादव तिहाड़ जेल पहुंचे हों।
साल 2013 में झूठा हलफनामा दाखिल करने के मामले में भी उन्हें कुछ दिनों के लिए जेल जाना पड़ा था।

📚 चेक बाउंस कानून क्या कहता है?

भारत में चेक बाउंस एक गंभीर अपराध है।
धारा 138 के तहत—

  • आरोपी को 2 साल तक की जेल
  • या चेक राशि से दोगुना जुर्माना
  • या दोनों हो सकते हैं।

🎭 कौन हैं राजपाल यादव?

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के पुवायां निवासी राजपाल यादव ने लखनऊ की भारतेंदु नाट्य अकादमी और दिल्ली के राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) से अभिनय सीखा।

उन्होंने ‘शूल’ से पहचान बनाई और बाद में—

  • हंगामा का राजा
  • भूल भुलैया का छोटा पंडित
  • चुप चुप के का बंड्या

जैसे किरदारों से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई।

✍️ निष्कर्ष

करीब 15 साल पुराने कर्ज और चेक बाउंस मामले में बार-बार दिए गए आश्वासन पूरे न कर पाने की वजह से आखिरकार अदालत को सख्त कदम उठाना पड़ा। हाई कोर्ट के आदेश के बाद राजपाल यादव को तिहाड़ जेल में सरेंडर करना पड़ा। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत तय करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WhatsApp icon
AWAZ PLUS
Contact us!
Phone icon
AWAZ PLUS