“किसी भी हमले का तुरंत जवाब दिया जाएगा” — ईरान के राष्ट्रपति की ट्रंप को खुली चेतावनी, खाड़ी में बढ़ा सैन्य तनाव

आवाज प्लस, अंतरराष्ट्रीय डेस्क

अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी एक बार फिर तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि परमाणु समझौते के लिए अब समय बहुत कम बचा है। इसके जवाब में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने साफ शब्दों में कहा है कि “किसी भी आक्रामकता का तुरंत और निर्णायक जवाब दिया जाएगा।”

ईरान के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने सरकारी टेलीविजन पर दावा किया कि अमेरिकी विमानवाहक पोतों में “गंभीर कमियां” हैं और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद कई अमेरिकी सैन्य ठिकाने ईरान की मध्यम दूरी की मिसाइलों की जद में हैं।

इसी बीच, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) से जुड़ी अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम के मुताबिक, ईरान ने संभावित अमेरिकी हमलों से निपटने की तैयारी में अपनी चारों सैन्य शाखाओं में 1,000 नए “रणनीतिक ड्रोन” शामिल किए हैं।

ईरान की चेतावनी, अमेरिका के नए प्रतिबंध

एपी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों की नई श्रृंखला लागू की है। इनमें ईरान के आंतरिक मंत्री पर भी कार्रवाई शामिल है, जिन पर विरोध प्रदर्शनों को दबाने के आरोप हैं।

वहीं इजरायली मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, एक अमेरिकी मिसाइल विध्वंसक पोत दक्षिणी इजरायली बंदरगाह एलाट में पहुंच चुका है, जिससे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और मजबूत हो गई है।

तुर्की की पहल: वार्ता बहाल करने की कोशिश

बढ़ते तनाव के बीच तुर्की ने कूटनीतिक पहल की है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने इस्तांबुल में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात कर अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता फिर से शुरू करने की अपील की।

फिदान ने कहा कि तुर्की किसी भी विदेशी हस्तक्षेप का विरोध करता है और संकट को संवाद से सुलझाने का पक्षधर है।

हालांकि, अराघची ने साफ किया कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन फिलहाल अमेरिकी अधिकारियों से सीधी वार्ता की कोई योजना नहीं है।

खाड़ी में बढ़ती हलचल, दुनिया की नजरें

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों, मिसाइलों और ड्रोन की तैनाती तथा प्रतिबंधों की नई लहर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

स्थिति पर दुनिया की नजरें टिकी हैं — क्या वार्ता से निकलेगा समाधान या बढ़ेगा टकराव?

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