लखनऊ के मोहन रोड स्थित शकुंतला मिश्र विश्वविद्यालय परिसर में संचालित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा से जुड़े एक बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। पारा पुलिस ने बैंक के ही बैंक मित्र शिवा राव को गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि उसने ग्राहकों को फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) थमाकर लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये की ठगी की है।
50 से ज्यादा लोगों से ठगी, 24 ने दर्ज कराई शिकायत
पुलिस के अनुसार, शिवा राव ने अब तक 50 से अधिक ग्राहकों को अपना शिकार बनाया। इनमें से 24 पीड़ितों ने संयुक्त तहरीर देकर पारा थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि शिकायतकर्ताओं में 17 महिलाएं शामिल हैं, जिससे साफ होता है कि उसने भरोसेमंद ग्राहकों को खासतौर पर निशाना बनाया।
घर पर बनाता था फर्जी FD
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि शिवा राव बैंक में जाकर FD नहीं बनवाता था।
- वह अपने घर पर लैपटॉप, प्रिंटर और स्कैनर की मदद से
- फर्जी FD और जमा पर्चियां तैयार करता था
- उन पर बैंक की मुहर लगाकर ग्राहकों को सौंप देता था
ग्राहक यह समझते रहे कि उनका पैसा सुरक्षित बैंक में जमा है, जबकि असल में रकम सीधे आरोपी की जेब में जा रही थी।
12 जनवरी को फूटा गुस्सा, बैंक में हंगामा
जब पीड़ितों को शक हुआ कि उनकी FD बैंक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है, तो 12 जनवरी को बड़ी संख्या में लोग बैंक पहुंचे। इस दौरान बैंक मित्र शिवा राव से तीखी नोकझोंक हुई। लोगों ने अपनी जमा रसीदें दिखाईं और पैसे वापस करने की मांग की। मामला बढ़ने पर पुलिस तक पहुंचा।
तेलंगाना का रहने वाला है आरोपी
पारा थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुरेश कुमार सिंह के अनुसार—
- शिवा राव मूल रूप से तेलंगाना का निवासी है
- वह पिछले 10 साल से बैंक मित्र के रूप में काम कर रहा था
- लंबे समय से काम करने के कारण उसने ग्राहकों का पूरा भरोसा जीत लिया था
जांच में यह भी सामने आया है कि उसने इस दौरान अकूत संपत्ति अर्जित की और ठगी की रकम करोड़ों में पहुंच सकती है।
फर्जीवाड़े में दूसरा आरोपी भी शामिल
पूछताछ में शिवा राव ने खुलासा किया कि दुबग्गा के बरावन कला निवासी दीपक भी इस फर्जीवाड़े में उसका सहयोग करता था। पुलिस ने दीपक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
मुख्य आरोपी शिवा राव को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
बैंक के कंप्यूटरों पर भी करता था काम
पुलिस के मुताबिक, शिवा 2015 से बैंक में कार्यरत था और—
- किसी भी लैपटॉप या बैंक कंप्यूटर पर बैठकर काम करने लगता था
- बैंक आने वाले हर ग्राहक से संपर्क साधता
- उन्हें आकर्षक बचत योजनाओं का लालच देकर FD कराने के लिए प्रेरित करता
यही वजह रही कि ग्राहक उस पर आंख मूंदकर भरोसा करते रहे।
इन लोगों की शिकायत पर दर्ज हुई FIR
पुलिस ने जिन पीड़ितों की शिकायत पर FIR दर्ज की है, उनमें
राम सिंह यादव, फूलचंद, गोमती यादव, पूनम, अर्पित यादव, गुड़िया, विक्रम सिंह, नरेश, राम प्यारी, रजनी राजपूत, अंजली, विशाल वर्मा, सुषमा गौतम, सरोजनी, जानकी, मीठी रावत, मोनी गौतम, नीलू अजीत, अनीता वर्मा, अनुराधा वर्मा, अनिता राजपूत, अनुपमा वर्मा और रामकुमार शामिल हैं।
बैंकिंग सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की ठगी का नहीं, बल्कि बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।
ग्राहकों का आरोप है कि—
- फर्जी FD लंबे समय तक चलती रही
- बैंक स्तर पर समय रहते कोई जांच नहीं हुई
- सबूत मिटाने की भी कोशिश की गई
निष्कर्ष
शकुंतला मिश्र विश्वविद्यालय परिसर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में सामने आया यह FD घोटाला लोगों के भरोसे के साथ की गई बड़ी धोखाधड़ी है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इस खेल में और कौन-कौन शामिल था और ठगी की वास्तविक रकम कितनी है।
