सच धीरे चलता है, लेकिन झूठ शोर मचाकर दौड़ता है—महोबा जिले में हालिया घटनाक्रम ने इस कहावत को एक बार फिर सच साबित कर दिया है। जिस मामले को कल तक प्रदेश के एक मंत्री के कथित घेराव के रूप में पेश किया जा रहा था, उसकी असली कहानी अब सामने आ चुकी है।

दरअसल, प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह बुंदेलखंड क्षेत्र में जल अर्पण कार्यक्रमों में शिरकत के लिए दौरे पर थे। इसी क्रम में महोबा जिले में आयोजित एक कबड्डी कार्यक्रम में भी उनका जाना प्रस्तावित था, जिसका आयोजन भाजपा कार्यकर्ता अनिल राजपूत द्वारा किया गया था। मंत्री का यह दौरा पूरी तरह शिष्टाचार और पार्टी कार्यकर्ता के सम्मान से जुड़ा था।
लेकिन यहीं से शुरू हुआ सियासी खेल
सूत्रों के मुताबिक, इस कार्यक्रम में मंत्री की उपस्थिति मौजूदा विधायक को नागवार गुजरी। वजह साफ है—अनिल राजपूत को आगामी विधानसभा चुनाव में क्षेत्र से मजबूत दावेदार माना जा रहा है, जबकि मौजूदा विधायक को क्षेत्र में बढ़ते असंतोष का सामना करना पड़ रहा है।

असंतोष, नजदीकियां और डर
चरखारी से मौजूदा विधायक की सपा से कथित नजदीकियों की चर्चाएं क्षेत्र में लंबे समय से हैं। जनता से दूरी, समस्याओं के प्रति उदासीनता और दबंग छवि के चलते नाराजगी भी खुलकर सामने आती रही है। राजनीतिक जमीन खिसकने के डर ने कथित तौर पर एक प्रपंच को जन्म दिया।
इतिहास भी कुछ ऐसा ही रहा है
विधायक के पिता गंगा चरण राजपूत का राजनीतिक सफर बार-बार पार्टी बदलने और ड्रामेबाजी के लिए जाना जाता रहा है। सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाए जाने के नाम पर कनपटी पर रिवॉल्वर रखने का नाटक आज भी लोगों को याद है।

सुनियोजित हंगामा?
बताया जा रहा है कि विधायक ने पहले मंत्री को अनिल राजपूत के कार्यक्रम में न जाने का संदेश भिजवाया, लेकिन मंत्री ने एक सामान्य कार्यकर्ता के सम्मान को प्राथमिकता देते हुए कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दे दी। इसी से नाराज होकर विधायक ने अपने समर्थकों के साथ मंत्री का रास्ता रोका, कैमरों के सामने मनगढ़ंत आरोप लगवाए और पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक ड्रामे में बदल दिया।
मकसद साफ बताया जा रहा है—
- पार्टी और सरकार की छवि को नुकसान
- खुद को बागी दिखाकर सहानुभूति बटोरना
- दूसरी पार्टियों से टिकट का रास्ता आसान बनाना
हकीकत क्या कहती है?
आरोपों और शोर-शराबे के बीच जमीनी सच्चाई कुछ और ही कहानी बयान कर रही है। महोबा जिला प्रदेश में नल कनेक्शन देने के मामले में दूसरे नंबर पर है, जहां 99.83 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा चुका है।

सोचने वाली बात है—
जो जिला विकास के पैमाने पर प्रदेश में शीर्ष पर हो, वहां सरकार और मंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोपों में आखिर कितना दम है?
सच यह है कि विकास बोल रहा है, और प्रपंच बेनकाब हो रहा है।
— आवाज प्लस के लिए विशेष
