नई दिल्ली: लोकसभा में शुक्रवार को उस वक्त जोरदार हंगामा देखने को मिला, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने महिला आरक्षण और परिसीमन (डिलिमिटेशन) के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने सरकार की नीतियों को निशाने पर लेते हुए विवादित टिप्पणी कर दी, जिसके बाद सदन का माहौल पूरी तरह से गरमा गया।

राहुल गांधी ने कहा कि महिला आरक्षण बिल वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए नहीं, बल्कि देश के चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम दक्षिण भारत, उत्तर-पूर्व और छोटे राज्यों के प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है।
अपने भाषण में राहुल गांधी ने कहा, “सच यह है कि जादूगर पकड़े गए हैं। बालाकोट के जादूगर, नोटबंदी के जादूगर, ऑपरेशन सिंदूर के जादूगर पकड़े गए हैं।” इस बयान के बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने जोरदार विरोध जताया और सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और यह देश की जनता का भी अपमान है। राजनाथ सिंह ने मांग की कि राहुल गांधी के शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटाया जाए और उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए।
बिल पर गणित फंसा
महिला आरक्षण से जुड़े तीनों विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत यानी 360 वोटों की जरूरत है। मौजूदा स्थिति में सरकार के पास लगभग 293 सांसदों का समर्थन है, जबकि विपक्ष और अन्य दलों के पास 232 सांसद हैं। इस लिहाज से सरकार अभी भी आवश्यक आंकड़े से 67 वोट पीछे है।
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और टीएमसी जैसे प्रमुख विपक्षी दल इस बिल का विरोध कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी ने इसमें मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग भी जोड़ दी है, जिससे मुद्दा और जटिल हो गया है।
राजनीतिक टकराव तेज
लोकसभा में हुए इस घटनाक्रम के बाद महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सियासी टकराव और तेज हो गया है। एक तरफ सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति करार दे रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर बहस और तेज होने के संकेत हैं।
