अबू धाबी: ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अमेरिका पर बड़ा दबाव बनाते हुए साफ संकेत दिया है कि अगर युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई नहीं की गई, तो वह डॉलर के बजाय वैकल्पिक मुद्राओं—खासतौर पर चीनी युआन—की ओर रुख कर सकता है।

युद्ध की कीमत पर टकराव
रिपोर्ट्स के मुताबिक, UAE ने अमेरिका को युद्ध के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उससे वित्तीय गारंटी और नुकसान की भरपाई की मांग की है। खाड़ी देशों का कहना है कि इस संघर्ष में उनके ऊर्जा और नागरिक ढांचे को भारी नुकसान हुआ है, जिसका बोझ वे अकेले नहीं उठा सकते।
बताया जा रहा है कि:
- अमेरिका इस युद्ध पर रोजाना करीब 890 मिलियन से 1 बिलियन डॉलर खर्च कर रहा है
- इज़राइल अब तक 11.2 बिलियन डॉलर खर्च कर चुका है
- खाड़ी क्षेत्र में पुनर्निर्माण की लागत 60 बिलियन डॉलर से अधिक आंकी गई है
दुबई और ऊर्जा ढांचे पर भारी नुकसान
ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों से UAE को बड़ा नुकसान हुआ है।
- दुबई के फेयरमॉंट द पाम होटल सहित कई नागरिक ठिकाने प्रभावित हुए
- फुजैरा तेल टर्मिनल को नुकसान
- दो बड़े डेटा सेंटर क्षतिग्रस्त, जिससे बैंकिंग और क्लाउड सेवाएं बाधित
इस स्थिति को देखते हुए UAE ने अमेरिका से “फाइनेंशियल बैकस्टॉप” यानी आर्थिक सुरक्षा जाल की मांग की है।
डॉलर पर दबाव, युआन विकल्प के रूप में
UAE के सेंट्रल बैंक गवर्नर ने अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात कर करेंसी स्वैप लाइन की मांग उठाई है। साथ ही चेतावनी दी है कि:
अगर डॉलर की उपलब्धता प्रभावित होती है, तो तेल व्यापार में चीनी युआन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
यह कदम वैश्विक स्तर पर डॉलर की स्थिति के लिए चुनौती माना जा रहा है।
ट्रंप प्रशासन के लिए बढ़ी मुश्किलें
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि अमेरिका खाड़ी देशों से युद्ध का खर्च साझा करने को कह सकता है। लेकिन अब UAE की मांग ने पूरा समीकरण उलट दिया है—अब खाड़ी देश अमेरिका से ही खर्च उठाने की मांग कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- यदि अमेरिका UAE की मांग मानता है, तो अन्य खाड़ी देश भी मुआवजे की मांग करेंगे
- इससे अमेरिका पर वित्तीय दबाव कई गुना बढ़ सकता है
ईरान ने भी ठोका दावा
इस बीच ईरान ने UAE, सऊदी अरब, कतर समेत कई देशों पर अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए 270 बिलियन डॉलर मुआवजे की मांग कर दी है।
शांति वार्ता पर अनिश्चितता
अमेरिका-ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम 22 अप्रैल को खत्म होने वाला है। अब तक हुई वार्ताएं बेनतीजा रही हैं, जबकि अगली बातचीत को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
मध्य-पूर्व में जारी यह संघर्ष अब केवल सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक और मुद्रा युद्ध का रूप भी लेता दिख रहा है। UAE की सख्त चेतावनी और युआन की ओर झुकाव, वैश्विक वित्तीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में अमेरिका की प्रतिक्रिया इस पूरे संकट की दिशा तय करेगी।
