लखनऊ:
मेरठ से प्रयागराज तक बनने वाला करीब 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे अब पूरी तरह तैयार है और इसका उद्घाटन 29 अप्रैल को नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा। उद्घाटन से पहले एक्सप्रेसवे की टोल व्यवस्था और एंट्री सिस्टम को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है, जिससे यात्रियों को पहले से ज्यादा पारदर्शी और सुविधाजनक अनुभव मिलेगा।

डिजिटल सिस्टम से होगी एंट्री, दूरी के हिसाब से कटेगा टोल
गंगा एक्सप्रेसवे पर वाहनों की एंट्री पूरी तरह डिजिटल होगी। जैसे ही कोई वाहन एक्सप्रेसवे में प्रवेश करेगा, उसकी डिजिटल एंट्री दर्ज की जाएगी और पूरा सफर ट्रैक किया जाएगा। एग्जिट प्वाइंट पर वाहन के निकलते ही तय दूरी के आधार पर स्वतः टोल की गणना कर ली जाएगी। खास बात यह है कि एंट्री पूरी तरह निशुल्क होगी।
“जितना सफर, उतना भुगतान” मॉडल लागू
नई टोल प्रणाली के तहत यात्रियों को केवल उतनी दूरी का ही भुगतान करना होगा जितनी दूरी उन्होंने तय की है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक शुल्क से राहत मिलेगी। पूरे एक्सप्रेसवे पर कुल 14 टोल प्लाजा बनाए गए हैं, जिनमें मेरठ और प्रयागराज मुख्य टोल प्वाइंट होंगे, जबकि बाकी 12 स्थानों पर एंट्री-एग्जिट आधारित टोल बूथ स्थापित किए गए हैं।
टोल दरें क्या होंगी?
- निजी कार/जीप/वैन: ₹2.55 प्रति किमी (पूरी दूरी ~₹1515)
- हल्के कमर्शियल वाहन: ₹4.05 प्रति किमी
- बस/ट्रक: ₹8.15 प्रति किमी
- भारी मशीनरी: ₹12.55 से ₹16.05 प्रति किमी
बिना रुके कटेगा टोल, नहीं लगेगा जाम
इस एक्सप्रेसवे की एक बड़ी खासियत यह भी है कि यहां टोल प्लाजा पर वाहनों को रुकना नहीं पड़ेगा। अत्याधुनिक सेंसर और ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए टोल अपने आप कट जाएगा, जिससे जाम की समस्या खत्म होगी और यात्रा तेज व सुगम बनेगी।
कनेक्टिविटी में होगा बड़ा बदलाव
गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा। इससे यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और व्यापार, पर्यटन व परिवहन को भी बढ़ावा मिलेगा।
(आवाज़ प्लस के लिए विशेष रिपोर्ट)
