आवाज़ प्लस | अंतरराष्ट्रीय समाचार
मुख्य खबर:
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने अमेरिका के साथ संभावित वार्ता को लेकर स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान हमेशा संवाद और समझौते का समर्थक रहा है, लेकिन वास्तविक बातचीत के रास्ते में प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन, आर्थिक नाकाबंदी और लगातार दी जा रही धमकियां बड़ी बाधाएं हैं।

पेज़ेश्कियन ने अमेरिका पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि दुनिया अब उसके “कथनी और करनी” के बीच के अंतर को साफ तौर पर देख रही है। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सीजफायर की समय-सीमा को अनिश्चितकाल तक बढ़ाने का ऐलान किया है।
ईरान की शर्तें स्पष्ट:
तेहरान ने दो टूक कहा है कि जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी (ब्लॉकेड) नहीं हटाता, तब तक किसी भी प्रकार की वार्ता संभव नहीं है। साथ ही ईरान ने यह भी साफ कर दिया कि धमकियों के साये में बातचीत का कोई औचित्य नहीं है।
ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा तनाव:
इस बीच ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर उसने नए प्रस्तावों को नहीं माना तो उसे “अभूतपूर्व परिणाम” भुगतने होंगे। उन्होंने ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाने तक की धमकी दी थी, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा गया है।
विश्लेषण:
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच संवाद की संभावनाएं बनी हुई हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में विश्वास की कमी और आक्रामक बयानबाजी किसी भी ठोस समझौते की राह को मुश्किल बना रही है।
ईरान ने एक बार फिर साफ संकेत दिया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अपनी शर्तों और सम्मान के साथ—अब नजरें इस पर हैं कि अमेरिका इस चुनौतीपूर्ण कूटनीतिक स्थिति में अगला कदम क्या उठाता है।
