CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग फिर तेज, राज्यसभा में 73 विपक्षी सांसदों का नया नोटिस

नई दिल्ली:
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विपक्ष ने एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाया है। शुक्रवार को राज्यसभा के 73 विपक्षी सांसदों ने उनके खिलाफ नया नोटिस पेश किया। यह नोटिस उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को सौंपा गया है।

सूत्रों के अनुसार, यह कदम तमिलनाडु विधानसभा चुनाव (234 सीटें) और पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान के बाद उठाया गया है। सांसदों का कहना है कि यह नया प्रस्ताव हाल ही में सामने आए तथ्यों और घटनाओं के आधार पर तैयार किया गया है।

तीन सदस्यीय जांच समिति की मांग
नोटिस में कहा गया है कि 15 मार्च 2026 के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा लिए गए फैसले और कथित चूक गंभीर स्तर के दुराचार की श्रेणी में आते हैं। विपक्ष ने मांग की है कि मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की जाए, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक मौजूदा न्यायाधीश, किसी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक अन्य न्यायिक सदस्य शामिल हों।
साथ ही यह भी मांग की गई है कि जांच पूरी होने तक ज्ञानेश कुमार चुनाव संबंधी कार्यों से स्वयं को अलग रखें।

पहले भी खारिज हो चुका प्रस्ताव
इससे पहले 12 मार्च को 63 राज्यसभा और 130 लोकसभा सांसदों ने भी हटाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे 6 अप्रैल को सभापति सी.पी. राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सबूतों के अभाव में खारिज कर दिया था।

पक्षपात के आरोप
नए नोटिस में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग ने आचार संहिता लागू करने में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। सांसदों ने 18 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 29 मिनट के भाषण का हवाला दिया, जिसे दूरदर्शन, संसद टीवी और आकाशवाणी पर प्रसारित किया गया था।
विपक्ष का दावा है कि यह भाषण चुनाव प्रचार से मिलता-जुलता था और इसमें विपक्षी दलों—कांग्रेस, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी—की आलोचना करते हुए मतदाताओं से उनके खिलाफ वोट देने की अपील की गई।

शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप
राज्यसभा सांसदों का कहना है कि 19 अप्रैल को मनोज कुमार झा, पी. संतोश कुमार और एम.ए. बेबी ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी, जबकि 20 अप्रैल को 700 नागरिकों ने भी ज्ञापन सौंपा।
आरोप है कि अब तक न कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, न ही कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी गई।

दोहरे मानदंड का आरोप
नोटिस में यह भी कहा गया है कि चुनाव आयोग ने भाजपा द्वारा विपक्षी नेताओं, खासकर कांग्रेस के खिलाफ की गई शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई की, जो दोहरे मानदंड को दर्शाता है।

विपक्ष का यह नया कदम आने वाले चुनावी चरणों के बीच राजनीतिक माहौल को और गर्मा सकता है। अब सभी की नजर राज्यसभा सभापति के अगले फैसले पर टिकी है।

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