मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। पहले यह नियम 1 मई, यानी महाराष्ट्र दिवस से लागू होना था, लेकिन विरोध के बाद इसे 6 महीने के लिए टाल दिया गया है।

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट किया कि इस दौरान ड्राइवरों का वेरिफिकेशन जारी रहेगा और उन्हें मराठी सीखने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सरकार अब सख्ती की बजाय प्रशिक्षण के जरिए भाषा सिखाने की रणनीति पर काम कर रही है।
🔴 क्या था पूरा मामला?
सरकार ने पहले घोषणा की थी कि मुंबई में ऑटो-टैक्सी चलाने वाले सभी ड्राइवरों के लिए मराठी बोलना जरूरी होगा। यहां तक कहा गया था कि भाषा नहीं आने पर परमिट रद्द किया जा सकता है। इस फैसले के बाद मराठी बनाम गैर-मराठी विवाद ने तूल पकड़ लिया।
🗣️ बयानबाज़ी से बढ़ा विवाद
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता अमित ठाकरे के बयान ने आग में घी का काम किया। उन्होंने चेतावनी दी थी कि आंदोलन के दौरान अगर किसी मराठी व्यक्ति को परेशानी हुई तो सख्ती से जवाब दिया जाएगा।
वहीं AIMIM नेता इम्तियाज जलील ने कहा कि मराठी सीखना अच्छी बात है, लेकिन भाषा के नाम पर गुंडागर्दी नहीं होनी चाहिए।
📚 अब क्या करेगी सरकार?
सरकार अब ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए एक बेसिक मराठी ट्रेनिंग कोर्स तैयार करेगी। इसमें पढ़ना-लिखना जरूरी नहीं होगा, बल्कि रोजमर्रा की बातचीत पर फोकस रहेगा।
इस काम में मुंबई मराठी साहित्य संघ और कोंकण मराठी साहित्य परिषद जैसे संगठन सहयोग करेंगे।
🚖 जमीनी असर
- 6 महीने तक कोई अनिवार्यता नहीं
- ड्राइवरों का वेरिफिकेशन जारी रहेगा
- मराठी जानने वाले ड्राइवरों पर स्टीकर लगाने की शुरुआत
- भाषा सीखने के लिए ट्रेनिंग सिस्टम तैयार होगा
मुंबई में भाषा को लेकर सियासत फिलहाल शांत होती दिख रही है। सरकार अब टकराव की जगह “सीखो और अपनाओ” मॉडल पर आगे बढ़ रही है। आने वाले 6 महीने तय करेंगे कि यह फैसला सख्ती में बदलेगा या स्थायी तौर पर नरम ही रहेगा।
