कोलकाता/नई दिल्ली:
पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल में एक वीडियो ने सियासी पारा हाई कर दिया है। यूपी कैडर के IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे कथित तौर पर TMC कार्यकर्ताओं को सख्त चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। चुनाव आयोग ने उन्हें साउथ 24 परगना में पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया है।

🔴 क्या है वायरल वीडियो का मामला?
South 24 Parganas के डायमंड हार्बर इलाके में चेकिंग के दौरान अजय पाल शर्मा का वीडियो सामने आया है। वीडियो में वे कथित तौर पर TMC उम्मीदवार जहांगीर खान और उनके समर्थकों को कानून व्यवस्था बिगाड़ने पर “कायदे से इलाज” करने की चेतावनी देते सुनाई दे रहे हैं।
यह इलाका अभिषेक बनर्जी का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है, जिससे मामला और राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया है।
🟢 TMC का आरोप, BJP पर निशाना
तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग के जरिए बीजेपी दूसरे राज्यों के “सख्त” अफसरों को भेजकर मतदाताओं और कार्यकर्ताओं को डराने की कोशिश कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह निष्पक्ष चुनाव की भावना के खिलाफ है।
🧑✈️ कौन हैं IPS अजय पाल शर्मा?
- 2011 बैच के यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी
- मूल रूप से लुधियाना (पंजाब) के निवासी
- कई जिलों में तैनाती के दौरान अपराधियों पर सख्त कार्रवाई के लिए चर्चित
- “एनकाउंटर स्पेशलिस्ट” और “सिंघम” जैसी छवि
- वर्तमान में प्रयागराज में जॉइंट सीपी पद पर तैनात
उनकी कार्यशैली को लेकर समर्थक जहां “जीरो टॉलरेंस” बताते हैं, वहीं विरोधी इसे “सख्ती की राजनीति” करार देते हैं।
🔥 महुआ मोइत्रा का तीखा वार
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए अजय पाल शर्मा पर तंज कसा और तीखी भाषा में जवाब दिया। उनके बयान ने विवाद को और भड़का दिया है।
⚔️ अखिलेश यादव भी कूदे मैदान में
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा “एजेंट” के तौर पर अधिकारियों का इस्तेमाल कर रही है और भविष्य में कार्रवाई की चेतावनी दी।
📊 चुनावी माहौल गरम
पश्चिम बंगाल में चुनाव पहले से ही हाई-वोल्टेज मुकाबले में बदल चुका है। इस वायरल वीडियो ने प्रशासन की भूमिका, निष्पक्षता और राजनीतिक दखल जैसे सवालों को फिर से केंद्र में ला दिया है।
एक वायरल वीडियो ने चुनावी मैदान को और गर्म कर दिया है। अब नजर चुनाव आयोग की कार्रवाई और आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी है—क्या यह मामला और तूल पकड़ेगा या प्रशासनिक सफाई से शांत होगा?
