वॉशिंगटन/इस्लामाबाद (आवाज़ प्लस):
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया है। इस्लामाबाद में दूसरे दौर की अहम वार्ता से पहले ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी भी दबाव में नहीं है और केवल “सही डील” का इंतजार कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ होने वाला नया समझौता पुराने परमाणु समझौते (JCPOA) से कहीं बेहतर होगा और यह पूरी दुनिया के लिए सुरक्षा कवच साबित होगा।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के लिए रवाना हो चुका है, जहां ईरानी नेतृत्व के साथ उच्च स्तरीय वार्ता प्रस्तावित है। बुधवार को सीजफायर की समय-सीमा समाप्त होने वाली है, ऐसे में यह बातचीत कूटनीति का आखिरी बड़ा प्रयास मानी जा रही है।
“पुराना समझौता सबसे खराब था”
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और जो बाइडेन की कड़ी आलोचना करते हुए JCPOA को अमेरिका के इतिहास का “सबसे खराब समझौता” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस डील ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने का रास्ता दिया, जबकि उनकी प्रस्तावित नई डील इस खतरे को पूरी तरह खत्म कर देगी।
1.7 अरब डॉलर के भुगतान पर उठाए सवाल
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि पूर्व प्रशासन ने 1.7 अरब डॉलर नकद राशि विमान के जरिए ईरान भेजी थी, जिससे ईरानी नेतृत्व को खुली छूट मिल गई थी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस तरह के किसी भी कदम से बचेगी और राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगी।
“डील नहीं तो बड़ा युद्ध संभव”
ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस्लामाबाद में वार्ता विफल रहती है, तो यह संघर्ष बड़े युद्ध में बदल सकता है। उन्होंने भरोसा जताया कि उनकी अगुवाई में होने वाला समझौता न सिर्फ इज़राइल और मध्य-पूर्व बल्कि यूरोप और अमेरिका समेत पूरी दुनिया में शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करेगा।
उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा
अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जेरेड कुश्नर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ का प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच रहा है। इससे पहले हुई 21 घंटे की लंबी बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई थी। अब सभी की नजरें इस दूसरे दौर की वार्ता पर टिकी हैं।
राजनीतिक निशाना भी साधा
ट्रंप ने डेमोक्रेट्स और मीडिया पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे अमेरिका की मजबूत स्थिति को कमजोर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि वे किसी भी दबाव में आकर समझौता नहीं करेंगे और केवल अमेरिका के हित में ही निर्णय लेंगे।
सीजफायर की समयसीमा खत्म होने से ठीक पहले इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से बेहद निर्णायक मानी जा रही है। अब देखना होगा कि यह कूटनीतिक प्रयास शांति की राह खोलता है या क्षेत्र को नए संघर्ष की ओर धकेलता है।
