उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में आज नारी शक्ति और महिला आरक्षण को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जहां महिलाओं की भूमिका को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया, वहीं विपक्ष पर इस ऐतिहासिक पहल को रोकने का आरोप लगाया।

देहरादून से बड़ी खबर, जहां विधानसभा के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महिलाओं की ताकत और योगदान को विस्तार से रेखांकित किया।
सीएम धामी ने कहा कि — “नारी केवल सहभागिता तक सीमित नहीं, बल्कि आज नेतृत्व की भूमिका में है”। उन्होंने रानी लक्ष्मी बाई, सावित्री बाई फुले और कल्पना चावला का उदाहरण देते हुए कहा कि महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित की है।
उन्होंने आगे कहा कि चंद्रयान मिशन से लेकर सेना और वायुसेना तक, हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और वे अग्रिम मोर्चे पर अपनी भूमिका निभा रही हैं।
राजनीतिक हमला तेज:
सीएम धामी ने विपक्ष, खासकर राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को संसद में बाधित किया।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33% आरक्षण देने का यह कदम केवल संख्या बढ़ाने का नहीं, बल्कि नीति निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का ऐतिहासिक प्रयास था।
पौराणिक संदर्भ से वार:
सीएम धामी ने अपने भाषण में महाभारत और रामायण का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह द्रौपदी के अपमान ने महाभारत को जन्म दिया और माता सीता के अपमान ने रावण के पतन का कारण बना, उसी तरह नारी का अपमान कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा।
परिसीमन पर सफाई:
गृह मंत्री अमित शाह के बयान का हवाला देते हुए सीएम ने कहा कि परिसीमन से किसी राज्य का नुकसान नहीं होगा और सभी का प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहेगा।
आधी आबादी का मुद्दा:
सीएम धामी ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने में बाधा डालकर विपक्ष ने देश की आधी आबादी के साथ अन्याय किया है। उन्होंने यह भी कहा कि अब महिलाएं समझ चुकी हैं कि उनके अधिकारों के लिए कौन ईमानदारी से काम कर रहा है।
सीएम धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल की सराहना करते हुए कहा कि नारी शक्ति को सशक्त बनाना ही नए भारत की असली नींव है।
