नई दिल्ली/इस्लामाबाद। वैश्विक तेल संकट के बीच पाकिस्तान से एक ऐसी प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसने भारत की आर्थिक और रणनीतिक ताकत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिर से रेखांकित कर दिया है। पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज़ मलिक ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि तेल संकट के दौरान भारत की तैयारी और संसाधन कहीं अधिक मजबूत हैं।

ईरान से जुड़े हालिया तनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इस संकट ने कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया, लेकिन भारत इस झटके को काफी हद तक संभालने में सफल रहा।
भारत की रणनीति बनी ढाल
पाकिस्तानी मंत्री ने बताया कि भारत के पास विशाल विदेशी मुद्रा भंडार (करीब 600 अरब डॉलर) और मजबूत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार है, जो संकट के समय तुरंत उपयोग में लाया जा सकता है। इसके साथ ही भारत ने विभिन्न देशों से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाकर सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखा।
भारत ने बढ़ती कीमतों के बीच टैक्स में कटौती जैसे कदम उठाकर आम जनता को राहत देने की भी कोशिश की, जो पाकिस्तान के लिए संभव नहीं हो पाया।
पाकिस्तान की सीमाएं आई सामने
मलिक ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान के पास रणनीतिक तेल भंडार नहीं है और देश केवल सीमित वाणिज्यिक भंडार पर निर्भर है। उनके अनुसार:
- कच्चे तेल का भंडार सिर्फ 5-7 दिन का
- रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद 20-21 दिन तक ही पर्याप्त
इसके विपरीत भारत के पास 60-70 दिनों तक का तेल भंडार मौजूद है।
आईएमएफ की शर्तों में बंधा पाकिस्तान
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को लेकर मंत्री ने International Monetary Fund (IMF) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आईएमएफ की सख्त शर्तों के तहत काम कर रहा है, जिसके चलते ईंधन पर टैक्स कम करने या सब्सिडी देने में सीमाएं हैं।
मंत्री के मुताबिक, पाकिस्तान को डीजल और पेट्रोल पर टैक्स संरचना में बदलाव करना पड़ा और मोटरसाइकिल चालकों को लक्षित सब्सिडी देनी पड़ी। हालांकि, इसके लिए भी आईएमएफ से विशेष बातचीत करनी पड़ी।
भारत बना उदाहरण
पाकिस्तान के मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। भारत की आर्थिक स्थिरता, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और रणनीतिक फैसले उसे इस संकट में अन्य देशों के मुकाबले कहीं बेहतर स्थिति में रखते हैं।
तेल संकट के इस दौर में पाकिस्तान द्वारा भारत की सराहना न सिर्फ एक बयान है, बल्कि यह भारत की मजबूत आर्थिक नीति और दूरदर्शी रणनीति का प्रमाण भी है। यह दर्शाता है कि वैश्विक संकट के समय तैयारियां और संसाधन किसी भी देश की असली ताकत होते हैं।
— Awaz Plus News
