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नई दिल्ली: कांग्रेस प्रवक्ता Pawan Khera को Supreme Court of India से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज जालसाजी और मानहानि के मामले में अग्रिम जमानत दे दी है। यह मामला असम पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था, जिसमें खेड़ा के बयान को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू हुई थी।

🔹 हाईकोर्ट का फैसला पलटा
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। अदालत ने कहा कि मामले में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के संकेत साफ दिखते हैं और ऐसे में व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा जरूरी है।
🔹 दोनों पक्षों पर कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने इस मामले में सिर्फ खेड़ा ही नहीं, बल्कि असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma पर भी टिप्पणी की।
- कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में लगता है कि खेड़ा के बयान राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से दिए गए थे
- साथ ही यह भी कहा कि हिमंता सरमा की तरफ से दिए गए कुछ बयान संसदीय भाषा के अनुरूप नहीं थे
🔹 क्या है पूरा मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि असम CM की पत्नी के पास विदेशी पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्ति है।
इसी बयान के आधार पर असम पुलिस ने उनके खिलाफ मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश के तहत केस दर्ज किया।
🔹 खेड़ा का पक्ष
खेड़ा ने अदालत में कहा कि:
- उनके बयान राजनीतिक संदर्भ में दिए गए थे
- पुलिस ने उनके बयानों की चुनिंदा व्याख्या करके केस बनाया
वहीं, अभियोजन पक्ष ने आरोपों को गंभीर बताते हुए जमानत का विरोध किया था।
🔹 फिलहाल राहत, लेकिन केस जारी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पवन खेड़ा को गिरफ्तारी से राहत मिल गई है। हालांकि, मामला अभी खत्म नहीं हुआ है और इसकी सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।
यह मामला अब सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है, जिस पर आगे की सुनवाई अहम रहेगी।
