हापुड़ में निलंबित लेखपाल सुभाष मीणा ने जहर खाकर की आत्महत्या, इलाज के दौरान हुई मौत

हापुड़ में भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित किए गए लेखपाल सुभाष मीणा (45) ने बुधवार को तहसील परिसर में जहरीला पेय पी लिया, जिसके बाद गुरुवार तड़के गाजियाबाद के मैक्स अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई
सुभाष पर खसरा-खतौनी की नकल निकालने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप लगा था, जिसके चलते उन्हें 3 जून को डीएम द्वारा तत्काल निलंबित कर दिया गया था

💬 परिजनों का आरोप – शिकायतकर्ता ने ही मांगी थी 5 लाख की रिश्वत

मृतक सुभाष मीणा के परिजनों का कहना है कि शिकायतकर्ता भूपेंद्र ने खुद सुभाष से 5 लाख रुपये मांगे थे और शिकायत वापस लेने की एवज में ब्लैकमेल कर रहा था। सुभाष ने पैसे देने से इनकार किया, जिसके चलते वह लगातार मानसिक तनाव में थे

🚨 घटना का सिलसिला – तहसील परिसर में पी जहरीला पदार्थ

*बुधवार सुबह सुभाष अपने चालक के साथ सरधना से धौलाना तहसील पहुंचे

*वहां पानी पीने के बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी

*नायब तहसीलदार के दफ्तर के पास उन्हें उल्टियां करते देखा गया

*उन्हें तुरंत पिलखुवा के रामा अस्पताल ले जाया गया

*हालत गंभीर होने पर गाजियाबाद के मैक्स अस्पताल रेफर किया गया

*गुरुवार तड़के उन्होंने दम तोड़ दिया

🗣️ लेखपाल संघ ने किया डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन

घटना के विरोध में लेखपाल संघ ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया
संघ के जिलाध्यक्ष चंद्रप्रकाश ने कहा –

“बिना जांच के सस्पेंशन और शिकायतकर्ता की ब्लैकमेलिंग ने एक ईमानदार लेखपाल की जान ले ली। यह प्रशासन की विफलता है। हम निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हैं।”

🏥 डीएम अभिषेक पांडे पहुंचे अस्पताल, दिए निष्पक्ष जांच के संकेत

डीएम अभिषेक पांडे गुरुवार सुबह मैक्स अस्पताल पहुंचे, परिजनों से मुलाकात की और घटना को “बेहद दुखद” बताया।
उन्होंने कहा –

“शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की गई थी। परंतु अब परिस्थितियों को देखते हुए निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों पर सख्त कदम उठाया जाएगा।”

📌 क्या है पूरा मामला?

*3 जून: डहाना गांव में जनचौपाल के दौरान एक किसान ने रिश्वत का आरोप लगाया

*उसी दिन: डीएम ने लेखपाल सुभाष मीणा को तत्काल सस्पेंड कर दिया

*10 जुलाई: सुभाष ने तहसील परिसर में आत्महत्या का प्रयास किया

*11 जुलाई सुबह: इलाज के दौरान मौत हो गई

⚠️ निष्पक्ष जांच की मांग

यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि मानसिक उत्पीड़न और सामाजिक दबाव सरकारी कर्मचारियों को किस हद तक प्रभावित कर सकते हैं। अब पूरे जिले में लेखपालों और राजस्व विभाग के बीच तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।

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