नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण को लेकर एक विस्तृत ब्लॉग के माध्यम से देशवासियों और राजनीतिक दलों से अहम अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत की नारी शक्ति देश की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती है और उनके सशक्तिकरण के बिना लोकतंत्र पूर्ण नहीं हो सकता।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि सितंबर 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक ऐतिहासिक कदम है, जिसे अब ज़मीनी स्तर पर लागू करने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव और आगामी विधानसभा चुनावों में महिला आरक्षण का प्रावधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
लोकतंत्र को अधिक प्रतिनिधिक बनाने की पहल
पीएम मोदी ने इसे केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब बताया। उनके अनुसार, संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से शासन अधिक संवेदनशील, संतुलित और जवाबदेह बनेगा।
उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन और अवसरों की उपलब्धता बढ़ने से महिलाओं की भूमिका हर क्षेत्र में मजबूत हुई है, लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व अभी भी अपेक्षाकृत कम है। इस असंतुलन को दूर करना समय की आवश्यकता है।
सामाजिक न्याय और संवैधानिक भावना से जुड़ा कदम
प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण को संविधान की मूल भावना—समानता और समावेशन—से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल महिलाओं को उनका उचित स्थान दिलाएगा, बल्कि लोकतंत्र को अधिक व्यापक और सहभागी बनाएगा।
सभी दलों से सहयोग की अपील
पीएम मोदी ने सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित में देखें और महिला आरक्षण के समर्थन में एकजुट हों।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह समय सामूहिक संकल्प का है और ऐसे निर्णय आने वाली पीढ़ियों की दिशा तय करते हैं।
प्रधानमंत्री का यह संदेश स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार महिला सशक्तिकरण को राजनीतिक स्तर पर नई ऊंचाई देने के लिए प्रतिबद्ध है। यदि 2029 तक महिला आरक्षण लागू होता है, तो भारतीय लोकतंत्र में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।
