काठमांडू। नेपाल की राजनीति में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब गृहमंत्री सुदन गुरुंग ने पद संभालने के महज एक महीने के भीतर ही इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने फैसले के पीछे नैतिक जिम्मेदारी और संपत्तियों को लेकर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच की जरूरत को मुख्य कारण बताया।

जनता के सवालों को बताया गंभीर
सुदन गुरुंग ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि उन्होंने नागरिकों द्वारा उनकी संपत्तियों और शेयरों से जुड़े मामलों पर उठाए गए सवालों को गंभीरता से लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि होनी चाहिए।
“पद से बड़ी है नैतिकता”
गुरुंग ने अपने बयान में कहा कि उनके लिए कोई भी पद नैतिक मूल्यों से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास बनाए रखना किसी भी जनप्रतिनिधि की पहली जिम्मेदारी होती है। उन्होंने वर्तमान समय के युवाओं, विशेषकर Gen Z की पारदर्शिता और सुशासन की मांग को भी अपने फैसले की प्रेरणा बताया।
जवाबदेही को बताया लोकतंत्र की नींव
गुरुंग ने देश के राजनीतिक इतिहास और बलिदानों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब सरकार या नेतृत्व पर सवाल उठते हैं, तो जवाबदेही तय करना अनिवार्य हो जाता है। उन्होंने कहा कि नैतिकता ही ऐसे समय में सबसे उचित मार्ग है।
नेपाल सरकार में पहले भी हुई कार्रवाई
गौरतलब है कि इससे पहले 9 अप्रैल को प्रधानमंत्री बालेन शाह ने श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीपक कुमार साह को अनुशासनहीनता के आरोप में पद से हटा दिया था। इस कार्रवाई को भी सरकार की सख्ती और जवाबदेही की नीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
सुदन गुरुंग का इस्तीफा नेपाल की राजनीति में नैतिकता और पारदर्शिता को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। यह कदम न केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी का उदाहरण है, बल्कि शासन में जवाबदेही की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
