लखनऊ/धर्म डेस्क:
हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में से एक गरुड़ पुराण में जीवन, मृत्यु और पुनर्जन्म से जुड़े कई रहस्यमयी पहलुओं का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह ग्रंथ विशेष रूप से मृत्यु के बाद की स्थिति और आत्मा की यात्रा पर केंद्रित है, लेकिन इसमें मृत्यु से पहले मिलने वाले संकेतों का भी उल्लेख किया गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब किसी व्यक्ति का अंत समय निकट आता है, तो उसके शरीर, मन और इंद्रियों में कुछ असामान्य बदलाव दिखने लगते हैं, जिन्हें यमराज के आगमन का संकेत माना जाता है।
मृत्यु से पहले मिलने वाले प्रमुख संकेत
1. सपनों में पूर्वजों का दिखना
गरुड़ पुराण के अनुसार, व्यक्ति को मृत्यु से पहले सपनों में अपने पूर्वज दिखाई देने लगते हैं। यदि वे दुखी या रोते हुए नजर आएं, तो इसे अशुभ संकेत माना जाता है।
2. आवाज का बंद होना
अंत समय में व्यक्ति बोलने में असमर्थ हो जाता है। गले से अस्पष्ट आवाज निकलती है, जैसे स्वर तंत्र काम करना बंद कर रहा हो।
3. दृष्टि कमजोर होना
व्यक्ति की आंखों की रोशनी धीरे-धीरे खत्म होने लगती है। आसपास की चीजें धुंधली या काली दिखाई देने लगती हैं।
4. हाथ की रेखाएं फीकी पड़ना
कहा जाता है कि मृत्यु के करीब आने पर हाथों की रेखाएं हल्की हो जाती हैं, मानो भाग्य की लकीरें अपना प्रभाव खो रही हों।
5. अदृश्य शक्तियों का अनुभव
व्यक्ति को आसपास ऐसी उपस्थिति का एहसास होने लगता है जो दूसरों को दिखाई नहीं देती। इसे यमदूतों या पूर्वजों की उपस्थिति माना जाता है।
6. परछाई का गायब होना
पानी, तेल या दर्पण में अपनी परछाई न दिखना या विकृत दिखना भी अंत समय का संकेत माना गया है।
7. यमदूतों का दर्शन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु से पहले व्यक्ति को यमदूत दिखाई देते हैं, खासकर उन लोगों को जिनके कर्म अच्छे नहीं होते।
8. शरीर से अजीब गंध आना
शरीर से एक विशेष प्रकार की गंध आने लगती है, जिसे ‘मृत्यु गंध’ कहा जाता है। यह शरीर की जैविक क्रियाओं के धीमा पड़ने का संकेत माना जाता है।
9. डरावने और विचित्र सपने
खुद को गिरते देखना, अंधेरे स्थानों में भटकना या सुनसान जगहों के सपने आना भी मृत्यु के निकट होने के संकेत बताए गए हैं।
धार्मिक दृष्टिकोण और उद्देश्य
गरुड़ पुराण, जो भगवान विष्णु की शिक्षाओं पर आधारित है, का उद्देश्य भय उत्पन्न करना नहीं बल्कि मनुष्य को सही जीवन जीने की प्रेरणा देना है। इसमें बताए गए संकेत व्यक्ति को अपने कर्मों का मूल्य समझाने और धर्म के मार्ग पर चलने की सीख देते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये संकेत आस्था और विश्वास से जुड़े हैं। हालांकि, आधुनिक विज्ञान इन बातों की पुष्टि नहीं करता, लेकिन भारतीय संस्कृति में इनका गहरा आध्यात्मिक महत्व है।
