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बाराबंकी। विद्युत विभाग पर दबाव बनाकर नियमों को ताक पर रखने की कथित कोशिश आखिरकार पुलिस केस तक पहुंच गई। मसौली 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र पर तैनात अवर अभियंता लाल जी सिंह की तहरीर पर दो व्यक्तियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
एफआईआर के अनुसार, आरोपी कथित रूप से संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर विद्युत कनेक्शन हासिल करने का प्रयास कर रहे थे। जब दस्तावेजों की जांच शुरू हुई तो मामला उल्टा पड़ गया। शिकायत में आरोप है कि इसके बाद रिश्वत की पेशकश, प्रेस का रौब, स्टिंग ऑपरेशन की धमकी, जेल भिजवाने और नौकरी से निकलवाने तक की बातें कही गईं।
न बिके JE, न झुका विभाग!
शिकायत के अनुसार, जेई ने कथित रिश्वत लेने से साफ इनकार कर दिया और पूरे मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर मुकदमा दर्ज कर लिया।
सबसे बड़ा सवाल...
क्या अब कुछ लोग **"प्रेस" और "स्टिंग" का नाम लेकर सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाने का नया कारोबार चला रहे हैं?
यदि एफआईआर में लगाए गए आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो यह केवल एक कनेक्शन का मामला नहीं बल्कि सरकारी व्यवस्था को धमकाकर नियम बदलवाने की कथित साजिश का गंभीर उदाहरण होगा।
AWAZ PLUS का सवाल
जो अधिकारी नियमों का पालन कर रहा था, उसे धमकाया क्यों गया?
क्या बिजली कनेक्शन अब तकनीकी मानकों से मिलेगा या दबाव और डर के दम पर?
नोट: यह समाचार पुलिस में दर्ज एफआईआर में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोप सिद्ध होना शेष है और अंतिम निर्णय न्यायालय एवं विवेचना के बाद ही होगा।
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