अबू धाबी/नई दिल्ली:
मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। ईरान ने सोमवार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर ड्रोन हमला किया, जिसमें फुजैराह स्थित एक तेल संयंत्र में आग लग गई। इस हमले में तीन भारतीय नागरिकों के घायल होने की पुष्टि हुई है।

फुजैराह क्यों है रणनीतिक रूप से अहम?
फुजैराह UAE के लिए बेहद महत्वपूर्ण तेल हब है। यह उस पाइपलाइन का अंतिम छोर (टर्मिनस) है, जिसका उपयोग UAE होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से बचते हुए तेल निर्यात के लिए करता है।
मौजूदा क्षेत्रीय तनाव में इस इलाके पर हमला ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक तेल बाजार दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
हमले में भारतीय नागरिक घायल
UAE में भारतीय दूतावास के अनुसार, ड्रोन हमले के दौरान फुजैराह पेट्रोलियम इंडस्ट्रीज जोन में आग लगी, जिसमें तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए।
दूतावास ने बयान जारी कर कहा कि वह स्थानीय प्रशासन के संपर्क में है और घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता दिलाई जा रही है।
भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
भारत सरकार ने इस घटना को लेकर सख्त रुख अपनाया है।
विदेश मंत्रालय (भारत) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा:
“फुजैराह पर हमला, जिसमें भारतीय नागरिक घायल हुए हैं, अस्वीकार्य है। नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना तुरंत बंद होना चाहिए।”
UAE में मिसाइल अलर्ट और दहशत
हमले के दौरान UAE में दो बार संभावित मिसाइल हमले के सायरन भी बजाए गए। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। हालांकि बाद में स्थिति को नियंत्रण में बताया गया।
सीजफायर के बावजूद बढ़ता खतरा
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे सीजफायर के बावजूद यह हमला संकेत देता है कि क्षेत्र में शांति अभी भी नाजुक बनी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की घटनाएं बड़े संघर्ष का रूप ले सकती हैं यदि स्थिति जल्द नियंत्रित नहीं की गई।
फुजैराह पर हमला सिर्फ एक सैन्य घटना नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा संकेत है। भारत सहित कई देशों की नजर अब मिडिल ईस्ट की बदलती स्थिति पर बनी हुई है।
