आवाज़ प्लस | विशेष रिपोर्ट
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब सीधे वैश्विक बाजारों पर दिखने लगा है। ईरान पर 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई है।

बताया जा रहा है कि इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया।
कच्चे तेल में 65% से ज्यादा उछाल
केडिया एडवायजरी के फाउंडर अजय केडिया के अनुसार, 28 फरवरी को कच्चे तेल की कीमत 6092 रुपये प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 10,057 रुपये प्रति बैरल तक पहुंच गई है। यानी महज कुछ हफ्तों में करीब 65% की भारी तेजी दर्ज की गई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद, सप्लाई पर बड़ा असर
तनाव के बीच ईरान ने अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया। यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति रूट्स में से एक है। इसके बंद होने से वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे कीमतें आसमान छूने लगीं।
धातु बाजार में भी तेजी
सिर्फ कच्चा तेल ही नहीं, बल्कि धातुओं के दाम भी बढ़े हैं—
- एल्युमिनियम: 18.61% बढ़कर 371 रुपये/किलो
- कॉपर: 4.45% की बढ़त
- जिंक: 4.81% की तेजी
क्या है आगे का असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और आम जनता की जेब पर पड़ेगा।
मिडिल ईस्ट संकट ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि वैश्विक राजनीति का असर सीधे आम आदमी तक पहुंचता है—चाहे वह पेट्रोल पंप हो या घरेलू बजट।
(आवाज़ प्लस के लिए रिपोर्ट)
