पेरिस: ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस ने अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने घोषणा की है कि फ्रांस का एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप स्वेज नहर के दक्षिण और लाल सागर की ओर बढ़ रहा है। इस कदम को फ्रांस और ब्रिटेन के संभावित संयुक्त रक्षात्मक मिशन की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।

फ्रांस का परमाणु ऊर्जा से संचालित युद्धपोत चार्ल्स डी गॉल और उसके साथ मौजूद युद्धपोतों को होर्मुज जलडमरूमध्य के नजदीक तैनात किया जा रहा है। यह वही समुद्री मार्ग है जहां ईरान युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। बड़ी संख्या में व्यापारिक जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई पर गंभीर असर पड़ा है।
राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि प्रस्तावित मिशन का मकसद समुद्री सुरक्षा बहाल करना और जहाज मालिकों व बीमा कंपनियों का भरोसा लौटाना है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह अभियान युद्ध में शामिल पक्षों से अलग एक “रक्षात्मक प्रयास” होगा।
मैक्रों ने यह भी बताया कि उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से बातचीत की है और इस मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump से भी चर्चा करेंगे।
फ्रांसीसी सेना के प्रवक्ता कर्नल गियोम वर्ने के मुताबिक, फ्रांस, ब्रिटेन और 50 से अधिक देशों के प्रस्तावित गठबंधन की कार्रवाई तभी शुरू होगी जब समुद्री जहाजों पर खतरा कम होगा और व्यापारिक कंपनियों को इस मार्ग पर दोबारा भरोसा होगा। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी सैन्य अभियान के लिए ईरान समेत पड़ोसी देशों की सहमति जरूरी होगी।
उधर, युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के बीमा प्रीमियम में भारी उछाल आया है। उद्योग जगत के अनुसार बीमा लागत पहले के मुकाबले 4 से 5 गुना तक बढ़ चुकी है।
फ्रांस और ब्रिटेन ने पहले भी पेरिस में आयोजित शिखर सम्मेलन में कई देशों के साथ समुद्री सुरक्षा को लेकर रणनीति बनाई थी। अब माना जा रहा है कि यूरोपीय देश होर्मुज में स्थिरता बहाल करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी में हैं।
