₹1 करोड़ का घर या ₹5 करोड़ की नेट वर्थ? किराये में रहकर करोड़पति बनने का नया ट्रेंड चर्चा में

भारत में लंबे समय से अपना घर खरीदना सफलता और आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता रहा है। लेकिन अब नई पीढ़ी के बीच एक अलग सोच तेजी से लोकप्रिय हो रही है—क्या घर खरीदने की बजाय किराये पर रहकर पैसा निवेश करना ज्यादा फायदे का सौदा है?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, घर खरीदने में बड़ी रकम एक ही एसेट में फंस जाती है, जबकि किराये पर रहने से वही पैसा म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और दूसरे निवेश विकल्पों में लगाया जा सकता है। यही वजह है कि “रेंट एंड इन्वेस्ट” मॉडल अब चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

कैसे बन सकती है बड़ी नेट वर्थ?

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति ₹1 करोड़ का घर खरीदने के बजाय उस रकम को 12-13 प्रतिशत औसत सालाना रिटर्न वाले निवेश विकल्पों में लगाता है, तो 20-25 वर्षों में यह राशि कई गुना बढ़ सकती है। इसी रणनीति को कुछ लोग करोड़ों की नेट वर्थ बनाने का स्मार्ट तरीका मान रहे हैं।

किराये पर रहने के फायदे

  • नौकरी या शहर बदलने में अधिक आसानी
  • भारी EMI और डाउन पेमेंट का दबाव नहीं
  • निवेश के लिए ज्यादा लिक्विड कैश उपलब्ध
  • शुरुआती करियर में आर्थिक लचीलापन

हालांकि, किराये पर रहने के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। समय के साथ किराया बढ़ता रहता है और अपना घर न होने का भावनात्मक पहलू भी कई लोगों को प्रभावित करता है।

क्या हर किसी के लिए सही है यह तरीका?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह रणनीति हर व्यक्ति के लिए सही नहीं हो सकती। जिन लोगों की आय स्थिर है और जिन्हें निवेश की अच्छी समझ है, उनके लिए “रेंट + इन्वेस्ट” मॉडल फायदेमंद साबित हो सकता है। वहीं जो लोग स्थिरता, सुरक्षा और अपने घर की भावना को प्राथमिकता देते हैं, उनके लिए घर खरीदना आज भी बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

बदल रही है लोगों की सोच

महंगे शहरों में बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों और निवेश के नए विकल्पों ने युवाओं की सोच को बदल दिया है। अब कई लोग घर खरीदने को अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि एक वित्तीय निर्णय के रूप में देखने लगे हैं। ऐसे में आने वाले समय में “किराये में रहो और निवेश करो” ट्रेंड और तेजी पकड़ सकता है।

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