आज के दौर में जहां ज्यादातर लोग सुरक्षित निवेश के लिए बैंक एफडी पर भरोसा करते हैं, वहीं बड़ी संख्या में निवेशक अब SIP यानी सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। वजह साफ है—लंबे समय में कंपाउंडिंग और शेयर बाजार की ग्रोथ से बड़ा रिटर्न मिलने की संभावना।

विशेषज्ञ मानते हैं कि छोटी रकम से शुरू की गई SIP भी समय के साथ बड़ा फंड बना सकती है। अगर कोई निवेशक हर महीने सिर्फ ₹2000 की SIP करता है और लंबे समय तक निवेश जारी रखता है, तो करोड़पति बनने का सपना भी पूरा हो सकता है।
35 साल में बन सकता है 1 करोड़ से ज्यादा का फंड
अगर SIP पर औसतन 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है, तो ₹2000 की मासिक SIP से करीब 35 साल में लगभग ₹1.10 करोड़ का फंड तैयार हो सकता है। इसमें निवेशक का कुल निवेश करीब ₹8.40 लाख होगा, जबकि बाकी रकम कंपाउंडिंग से मिलने वाले रिटर्न की होगी।
वहीं अगर औसतन 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है, तो यही ₹2000 की SIP करीब 30 साल में लगभग ₹1.12 करोड़ तक पहुंच सकती है। इसमें कुल निवेश करीब ₹7.20 लाख और अनुमानित रिटर्न ₹1.05 करोड़ के आसपास होगा।
कंपाउंडिंग है सबसे बड़ा हथियार
विशेषज्ञों के मुताबिक SIP में सबसे ज्यादा फायदा समय का होता है। जितने लंबे समय तक निवेश जारी रखा जाता है, कंपाउंडिंग उतनी ही तेजी से काम करती है। यही वजह है कि छोटी रकम भी लंबे समय में बड़ा फंड बना देती है।
टैक्स का भी रखना होगा ध्यान
SIP से होने वाले मुनाफे पर कैपिटल गेन्स टैक्स लागू होता है। अगर निवेश 12 महीने से ज्यादा समय तक रखा जाता है तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स देना पड़ता है, जिसकी मौजूदा दर 12.5 प्रतिशत है।
वहीं 12 महीने से पहले पैसा निकालने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लागू होता है, जो 20 प्रतिशत तक हो सकता है। ऐसे में लंबे समय तक SIP जारी रखना निवेशकों के लिए ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
निवेश से पहले क्या समझना जरूरी?
हालांकि SIP बाजार से जुड़ा निवेश है, इसलिए इसमें जोखिम भी होता है। बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद लंबे समय तक निवेश बनाए रखने वाले निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेश हमेशा अपनी आय, जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।
