अफ्रीकी देश Democratic Republic of the Congo में इबोला वायरस के नए प्रकोप ने एक बार फिर वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (Africa CDC) ने पुष्टि की है कि कांगो के इटुरी प्रांत में इबोला संक्रमण तेजी से फैल रहा है। अब तक 246 संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जबकि 65 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि प्रयोगशाला जांच में फिलहाल 4 मौतों की पुष्टि हुई है और बाकी मामलों की जांच जारी है।

सीमावर्ती इलाकों में बढ़ा खतरा
संक्रमण मुख्य रूप से मोंगवालु और रवामपारा स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैल रहा है, जबकि कुछ मामले बुनिया शहर में भी पाए गए हैं। यह इलाका Uganda और South Sudan की सीमाओं के बेहद करीब है, जिससे संक्रमण के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने की आशंका बढ़ गई है।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, क्षेत्र में लगातार हिंसा, सशस्त्र समूहों की गतिविधियां और बड़े पैमाने पर लोगों के विस्थापन के कारण हालात और गंभीर हो गए हैं। राहत कार्य और स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने में भी भारी दिक्कतें आ रही हैं।
कौन सा इबोला स्ट्रेन फैला?
प्रारंभिक जांच में यह मामला इबोला ज़ैरे स्ट्रेन से जुड़ा माना जा रहा है। यही वह खतरनाक प्रकार है जिसने 2018 से 2020 के बीच कांगो में भारी तबाही मचाई थी और 1000 से ज्यादा लोगों की जान ली थी। हालांकि वैज्ञानिक अभी जीन सीक्वेंसिंग के जरिए इसकी अंतिम पुष्टि करने में जुटे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कांगो के पास इबोला वैक्सीन और कुछ दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन हर वैक्सीन सभी प्रकार के इबोला वायरस पर असरदार नहीं होती। इसलिए वायरस की सही पहचान बेहद जरूरी मानी जा रही है।
युगांडा में भी मिला मामला
इसी बीच Uganda में भी इबोला संक्रमण का एक मामला सामने आया है। अधिकारियों के मुताबिक, कांगो से जुड़े एक व्यक्ति की मौत के बाद जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई। इसे ‘आयातित मामला’ बताया गया है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए सभी लोगों को क्वारंटीन कर दिया गया है।
आखिर कितना खतरनाक है इबोला?
इबोला एक अत्यंत घातक वायरस है, जो पहले जंगली जानवरों से इंसानों में फैलता है और फिर संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी, पसीने और अन्य शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से तेजी से फैलता है। संक्रमित कपड़े, बिस्तर और अन्य वस्तुएं भी संक्रमण का कारण बन सकती हैं।
इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, उल्टी, दस्त, मांसपेशियों में दर्द और गंभीर मामलों में अंदरूनी या बाहरी रक्तस्राव शामिल हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है।
हाई लेवल मीटिंग में बनी रणनीति
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अफ्रीका CDC ने कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ आपात उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। बैठक में संक्रमण रोकने, सीमा निगरानी बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
इबोला का यह नया प्रकोप अफ्रीका के लिए एक बार फिर बड़ा स्वास्थ्य संकट बनता नजर आ रहा है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
